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केदारनाथ आपदा प्रभावित पुजारियों की हालत बदहाल

Fri, 19 Feb 2016 01:54 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 19 Feb 2016 01:54 PM IST
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kedarnath disaster affected pujari facing problem.

जून 2013 में आई आपदा का असर केदारनाथ से रूद्रप्रयाग तक काफी कुछ तबाह कर ले गया। इससे प्रभावित पुजारियों की हालत अब भी बदहाल है। आपदा में रूद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी के समीप स्थित कालीमठ मंदिर का आधा हिस्सा भी बहा। मंदिर तक पहुंचाने वाला पूरा पुल ही बह गया।

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मंदिर के पुजारियों को जब कोई सरकारी सहयोग नहीं मिला तो दानदाताओं की मदद से 40 लाख रुपये जुटाकर मंदिर के बहे हिस्से को फिर से बनवाया। जैसे-तैसे ग्रामीणों ने मंदिर तक जाने के लिए लकड़ी का छोटा पुल तैयार किया। इस बीच कोई श्रद्धालु मंदिर नहीं जा सका और अब भी मंदिर तक ले जाने को कोई सीधा रास्ता नहीं है।
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ऐसे में मंदिर के 36 पुजारियों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई। पुजारी लगातार मांग कर रहे हैं कि जिस तरह से केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों को मुआवजा दिया जा रहा है, उसी तरह से उन्हें भी दिया जाए। उनका कहना है कि सरकार ने कालीमठ सिद्धपीठ की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया, क्या हम आपदा प्रभावित नहीं है? कुछ समय पहले जब मुख्यमंत्री कालीमठ पहुंचे थे तब उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने भी अपनी बात रखी थी।
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क्या कहते हैं पुजारी

आपदा के बाद से आर्थिक स्थिति इस कदर बिगड़ गई है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए भी पैसा पूरा नहीं पड़ रहा है। कई आवश्यक चीजों में कटौती कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद पुजारियों की कोई सुध लेने वाला नहीं है।  
- दिनेश गौड़, पुजारी, कालीमठ

बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित हैं, इसलिए मुआवजा मांग कर रहे हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटने से आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। मंदिर तक पहुंचाने वाला रास्ता तक ठीक नहीं हुआ तो भला श्रद्धालु भी कैसे आएंगे?
- चंद्रमोहन भट्ट, पुजारी कालीमठ

दो साल बाद भी नहीं बना पुल

kedarnath disaster affected pujari facing problem.

मंदिर तक पहुंचने वाले पुल का काम धीमी गति से चल रहा है। दो साल बाद भी यह निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि अधिक से अधिक एक साल में पुल तैयार हो जाना चाहिए था। लकड़ी के पुल से रिस्क लेकर भला क्यों कोई श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचेगा? कुछ श्रद्धालु तो रास्ता नहीं मिल पाने की वजह से वापस हो जाते हैं।

कालीमठ मंदिर के पुजारियों ने मुख्यमंत्री से मुआवजे की मांग की थी। पुजारियों का पत्र मिल गया था। मंदिर के करीब 36 पुजारियों की सूची तैयार की गई है। सरकार के स्तर से मुहर लगने पर पुजारियों को मुआवजा मिलेगा। केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों का मुआवजा प्रक्रिया में है।
- मनोज अस्वाल, पटवारी, तहसील ऊखीमठ (कालीमठ क्षेत्र)

मंदिर समिति की ओर से पुजारियों को सैलरी दी जाती है। आपदा में मारे गए 19 कर्मचारियों के परिवार वालों को ही समिति की ओर से 5-5 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी गई है। इसके अलावा और किसी को समिति मुआवजा देने के पक्ष में नहीं है।
- बीडी सिंह, सीईओ, बदरी-केदार मंदिर समिति

माना जाता है कि कालीमठ मंदिर में महाकाली प्रकट हुईं और उन्होंने रक्तबीज राक्षस का संहार किया। इसके बाद वह कुंड में समा गईं। यह उत्तर भारत का श्रेष्ठ तंत्र पीठ है। पूर्व में यहां बकरों की बलि दी जाती थी, लेकिन अब यह प्रथा खत्म हो गई है। अब यहां नारियल की बलि दी जाती है।

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