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केदार के पुनर्निर्माण की ओर बढ़ाया एक कदम

Fri, 15 Aug 2014 01:44 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 15 Aug 2014 01:44 PM IST
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kedarnath dham uttarakhand

आखिरकार केदारनाथ धाम को नए सिरे से स्थापित करने में एक कदम आगे और बढ़ाया गया है।

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पुनर्निर्माण से संबंधित रिपोर्ट भी सौंपी
गुरुवार को को जीएसआई (जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया) ने मुख्य सचिव सुभाष कुमार को केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण से संबंधित रिपोर्ट भी सौंप दी।

रिपोर्ट में जीएसआई ने केदारनाथ मंदिर के पिछले हिस्से में आए बोल्डरों से कोई छेड़छाड़ न करने की सलाह दी है। जीएसआई ने वर्तमान में केदारनाथ मंदिर के आसपास के टाउनशिप को ध्वस्त करने की सलाह भी दी है।

सचिवालय में मुख्य सचिव सुभाष कुमार को जीएसआई के उप महानिदेशक टीएसपांगती ने यह रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में मंदिर के पिछले हिस्से में आये बोल्डर से छेड़छाड़ न करने का सुझाव दिया गया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक इन बोल्डरों को अपने स्थान पर ही मजबूति से रहने के लिए आधार तैयार किया जा सकता है। जीएसआई ने वर्तमान में क्षतिग्रस्त टाउनशिप को ध्वस्त करने का भी सुझाव दिया है।
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केदारनाथ मंदिर के सामने निचले हिस्से में पुजारियों और कर्मचारियों के लिए प्री फैब्रिकेटेड आवास बनाये जायं। नीचे की ओर जो दो बड़े मैदान हैं उनमें पानी का रिसाव होता रहता है।

इसके लिए पानी की निकासी की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। रिपोर्ट में मंदाकिनी नदी के बायें तट पर कटाव को रोकने को भी कहा गया है।

प्रभावित जिलों के लिए टास्क फोर्स का गठन
पांगती के मुताबिक जीएसआई ने पांचों आपदा प्रभावित जिलों के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है। इसी तरह की एक टास्क फोर्स केदारनाथ केलिए भी गठित की गई थी। इस टास्क फोर्स की संस्तुतियों के आधार पर ही जीएसआई ने केदारनाथ के पुनर्निर्माण का खाका तैयार किया है।

जीएसआई की यह दूसरी रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट का सरकार भी बेसब्री से इंतजार कर रही थी। कारण यह भी था कि सरकार को अभी यह तय करना है कि केदारनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्र में ध्वस्त मकानों और मलबे का क्या किया जाए।

मंदिर से छेड़छाड़ न करने का इरादा सरकार पहले ही जाहिर कर चुकी है और यह काम एएसआई केजिम्मे है। इसी तरह केदारनाथ धाम से अलग हटकर टाउनशिप बनाने का इरादा सरकार पहले ही कर चुकी है। इसके लिए लिचौंली का सुझाव भी है।

जीएसआई की इस रिपोर्ट से जाहिर है कि सरकार को अब केदारनाथ में बहुत अधिक निर्माण की इजाजत नहीं मिल पाएगी। इसी तरह केदारनाथ धाम के मंदाकिनी वाले हिस्से की तरफ बाढ़ नियंत्रण और स्लोप स्टेबलाइजेशन का काम भी सरकार को करना होगा।


हालांकि कुछ हद तक यह काम शुरू किया भी जा चुका है। केदारनाथ में एक वर्ग दुकानों और लॉज मालिकों के लिए पुराने हिस्से पर ही निर्माण करने के पक्ष में है। जीएसआई की इस रिपोर्ट से इस वर्ग को झटका लगा है।

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