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केदारनाथ-बदरीनाथ में सादगी से मनाई गई दिवाली
अमर उजाला, गढ़वाल
Updated Tue, 05 Nov 2013 02:17 PM IST
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उत्तराखंड के केदानाथ में दिवाली पर आपदा का असर देखा गया। अधिकांश स्थानों पर दीपपर्व सादगी से मनाया गया। आपदा के कारण अधिकांश स्थानों में आतिशबाजी रस्म अदायगी तक सिमटी रही।
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परंपराओं को निभाया
कर्णप्रयाग संवाददाता के अनुसार प्रकाश पर्व दीपावली का त्योहार नगर सहित सिमली, लंगासू, नौटी, कपीरी क्षेत्र, गौचर, आदिबदरी, गैरसैंण में उमंग और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने अपने घरों को जहां रंग-बिरंगी फूलझड़ियों और मोमबत्तियों से सजाया। उधर पिंडरघाटी के नारायणबगड़, थराली और देवाल में भी आपदा के बाद इस बड़े त्योहार को लोगों ने सादगी के साथ मनाया। लोगों ने घरों में दीपावली की सभी परंपराओं का निर्वहन किया।
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कोटद्वार के बाजारों में रही भीड़
दीपावली के दिन सुबह से ही बाजार में लोगों की भीड़ लग गई थी। शाम होते-होते झंडा चौक और आस-पास के मार्केट में भारी भीड़ रही। मिठाई, आतिशबाजी की दुकानों पर लोगों की लंबी लाइन लगी रही। शाम होते ही लक्ष्मी पूजा के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ। वहीं दुगड्डा, लैंसडौन, यमकेश्वर, धुमाकोट, बैजरो, रिखणीखाल, जयहरीखाल आदि क्षेत्रों में भी लोगों ने दीपावली में आतिशबाजी की। गांवों में स्वाली (पूरी) पकोड़ी बनाकर त्योहार मनाया। गांवों में लोगों ने रात को भैला खेले, और ढोल-दमाऊं की थाप पर जमकर नाचे।
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पौड़ी में रही धूम
पौड़ी मुख्यालय में दीपों का त्योहार दीपावली की खासी धूम रही। पूरा शहर तो रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाया। देर रात तक आतिशबाजी होती रही। खिर्सू पाबौ, कल्जीखाल कोट आदि विकास खंडों में भी दीपावली की धूम रही।
गोपश्वर में दिखा असर
आपदा की मार दीपावली के त्योहार पर भी देखने को मिली। जिले भर में दिवाली का त्योहार रस्म अदायगी के साथ मनाया गया। गोपेश्वर समेत जोशीमठ, पीपलकोटी, पोखरी, घाट और नंदप्रयाग में लोगों ने अपने घरों को दीपमाला से सजाया तो लेकिन पटाखों की गुंज इस बार कम ही सुनाई दी। जिले के कई इलाकों में आपदा ने कई लोगों को बेघर कर दिया, तो कई लोगों को रोजगार छिनने का मलाल दिवाली पर दिखाई दिया। हर कोई सादगी से त्योहार मनाता दिखा।
मठ मंदिरों में पूजा के बाद मनाई जाती थी दिवाली
क्षेत्र में स्थानीय मठ मंदिरों में विशेष पूजा के बाद घरों में उल्लास के साथ दीपावली मनाई जाती थी। लेकिन इस वर्ष मंदिरों में होने वाले आयोजनों पर भी आपदा को सीधा असर देखने को मिला। मंदिरों में होने वाले धार्मिक आयोजन की परंपरा का महज निर्वहन ही होता दिखाई दिया।
देर रात तक आतिशबाजी का दौर
उत्तरकाशी में आपदा की मार के बावजूद जनपद के कस्बाई इलाकों में दीपावली का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली की रौनक फीकी रही। लक्ष्मी पूजन के साथ ही देर रात तक आतिशबाजी का दौर चला।
घरों में बनाई रंगोली
श्रीनगर में दीपावली पर लोगों ने पारंपरिक तरीके से गायों का पूजन कर उन्हें चावल के बनाए लड्डू खिलाए। घरों में रंगोलियां बनाई गई और देर रात तक आतिशबाजी हुई। दूसरी ओर संयुक्त छात्र परिषद ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर दीपदान कर दीपावली मनाई। छात्रों ने विश्वविद्यालय गेट को मोमबत्तियों से सजाया। अंकित कप्रवाण ने बताया कि इसका उद्देश्य प्रदूषण मुक्त ईको फ्रेंडली दीपावली के लिए लोगों को जागरूक करना है। इस मौके पर पुष्पेंद्र पंवार, विकास कठैत, नवीन कंडवाल, दीपक सज्वाण, विकास चौहान आदि मौजूद थे।
नहीं मनाई दीपावली
कंडीसौड़ टिहरी के थौलधार ब्लाक के इडियान और क्यारी न्याय पंचायत के साथ ही कंडीसौड़, जसपुर, साणौं और धरवाल गांव सहित कई गांव में दीपावली नहीं मनाई गई। क्षेत्र के ध्यान सिंह राणा और अर्जुन राणा ने बताया कि धनोल्टी विधानसभा में शामिल क्षेत्र को ओबीसी का दर्जा देने की मांग पर कोई अमल न होने पर ग्रामीणों ने यह निर्णय लिया है।
हड़ताली कर्मियों ने भी नहीं मनाई दिवाली
उत्तरकाशी। लंबित मांगों के प्रति सरकार के उपेक्षित रवैये से खिन्न हड़ताली राज्य कर्मचारियों ने इस बार दीपावली नहीं मनाई। दीपावली के दिन भी उन्होंने कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने जल्द कार्रवाई न होने पर सरकारी दफ्तरों पर तालाबंदी की चेतावनी दी। इस मौके पर गोकुल प्रसाद कंसवाल, राजेंद्र पंवार, द्वारिका बिजल्वाण, केएन सिंह, बीएल भारती, एसएस पंवार, आरएस राणा, जीपी बडोनी, विशेश्वर प्रसाद, अर्जुन चौहान, शैला बिष्ट समेत कई कर्मचारी मौजूद थे।