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अपनी कुलदेवी को पूजने रानीबाग पहुंचे कत्यूरी वंशज
अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 14 Jan 2014 10:16 AM IST
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कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न स्थानों से कत्यूरी वंशजों ने सोमवार को रानीबाग पहुंचकर जियारानी की पूजा अर्चना की।
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उत्साह से लिया भाग
जियारानी के घाघरे के प्रतीक चित्रशिला पर पूजा अर्चना के बाद रातभर जागर लगाकर अपनी कुल देवी को प्रसन्न करने के लिए उत्साह से भाग लिया।
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उत्तरायणी पर्व पर सूर्यवंशी कत्यूरी वंशज कुमाऊं और गढ़वाल के दूरस्थ क्षेत्रों से रानीबाग पहुंचकर अपनी कुल देवी जियारानी की याद में रात्रि जागरण कर पूजा अर्चना की।
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भिकियासैंण रामनगर, पौड़ी, चौखुटिया, अल्मोड़ा, सल्ट, द्वाराहाट, रानीखेत समेत कुमाऊं-गढ़वाल के तमाम इलाकों से पहुंचे लोगों ने रात्रि में गार्गी नदी में स्नान के बाद जियारानी के घाघरे के प्रतीक चित्रशिला की पूजा अर्चना और परिक्रमा की।
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कत्यूरी वंशजों में रानीबाग पहुंचे प्रमुख रूप से केड़ा (रामनगर) के भोला सिंह, शिव सिंह जंतवाल, पान सिंह जंतवाल के नेतृत्व में कत्यूरियों का दल पारंपरिक ध्वज के साथ पहुंचा।
रात में नदी में स्नान के बाद जागर
जालीखाल, सल्ट, मौलेखाल से पूरन मनराल, मंगल सिंह मनराल, जयहरीखाल (पौड़ी) से सुरेंद्र सिंह, गेंदन लाल, मुक्तेश्वर से किशन सिंह बिष्ट, रिखड़ीखाल (पौड़ी) के मोहन सिंह, ईड़ा बाराखाम (द्वराराहाट) के देव सिंह बिष्ट, गोपाल सिंह, प्रताप सिंह समेत तमाम इलाकों में अलग-अलग जत्थों में पहुंचे महिला पुरुषों ने रात में नदी में स्नान के बाद जागर लगाई।
नाचती हुई महिलाओं को जियारानी का प्रतीक मानकर उनके साथ नदी में स्नान कर रहे थे। सच्चे दरबार की जय के नारे के साथ जियारानी की पूजा की।
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कत्यूरी वंशजों का कहना था कि यह हमारी कुलदेवी हैं। सभी मनोकामना पूरी करती हैं। उनका कहना था कि वे 15 साल से यहां आ रहे हैं। सभी ने स्नान के बाद चित्रशिला को प्रणाम कर सभी दलों ने जियारानी के गुफा के दर्शन किए।
स्थल चयन कर जियारानी की याद में रात्रि जागरण किया गया। सुबह स्नान करने के बाद सभी लोग अपने घरों को लौट जाएंगे।