पत्थरबाजी छोड़ अब राष्ट्रीयता की सीख लेंगे 23000 कश्मीरी छात्र, वेद और संस्कृत भी पढ़ेंगे
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कश्मीरी छात्रों को पत्थरबाजी के बजाय राष्ट्रीयता की सीख दी जाएगी। इसके लिए उत्तराखंड सरकार जल्द ही एक आयोजन करने जा रही है, जिसमें यहां पढ़ रहे करीब 23 हजार कश्मीरी छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के लिए भी तीन दिन का सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है।
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धनसिंह रावत ने ज्ञानकुंभ में बताया कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में जल्द ही योग, वेद और संस्कृत को अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही कश्मीर में लगातार बढ़ रही पत्थरबाजी की घटनाओं के मद्देनजर यह तय किया गया है कि उत्तराखंड में ऐसा कार्यक्रम किया जाएगा, जिससे कश्मीर के युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना विकसित हो सके। पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए भी उनके मुख्यमंत्रियों को बुलाकर ऐसा ही एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
हर साल सम्मानित होंगे पांच प्रोफेसर
माध्यमिक शिक्षा की तर्ज पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों या महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले पांच प्रोफेसर को हर साल शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2019 से इसकी शुरुआत होने जा रही है।
हर विवि में होगा गढ़वाली-कुमाऊंनी स्टडी सेंटर
उत्तराखंड सरकार ने तय किया है कि अगले सत्र से प्रदेश के हर विवि में गढ़वाली और कुमाऊंनी का एक-एक स्टडी सेंटर खोला जाएगा। देश-विदेश के 100 विश्वविद्यालयों के साथ उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों का करार होने जा रहा है, जिससे वह ज्ञान को साझा कर सकेंगे।
प्रदेश के 4300 प्रोफेसरों का प्रशिक्षण जून में
उत्तराखंड के 4300 असिस्टेंट, एसोसिएट और प्रोफेसरों का जून में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर पतंजलि योगपीठ में आयोजित किया जाएगा। इसमें सभी शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा से रूबरू कराया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के 100 मेधावी छात्रों को पतंजलि में मुफ्त शोध करने का मौका मिलेगा, इसके लिए जल्द ही उत्तराखंड सरकार और पतंजलि के बीच एमओयू साइन किया जाएगा।