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Kargil War Hero: साथियों के शव देख खौला था खून, उस रात इस बात से मिली ताकत, फिर 16 दिन खाना छोड़ लड़ी जंग

Tue, 26 Jul 2022 09:59 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 26 Jul 2022 09:59 AM IST
सार

युद्ध की सूचना आई तो चंद्रबनी निवासी हवलदार राजेश मल्ल और अरविंद सिंह भी अपनी बटालियन के साथ कश्मीर पहुंच गए। मंजर खौफनाक था। सबसे पहले काले झंडे लगी गाड़ियों से सामना हुआ। इनमें रखी शहीद जांबाजों की लाशें देखकर खून खौल जाता था। 1/11 गोरखा राइफल्स के साथ मिलकर कारगिल युद्ध शुरू किया।

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Kargil Vijay Diwas 2022 Know About Bravery of Kargil Hero All Details in Hindi
कारगिल के दो हिरो - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

चारों तरफ घाटियों में गोलियों और बम की आवाज गूंज रही थी। खाने का इंतजाम नहीं था तो कपूर जलाकर मैगी बनाकर काम चलाते थे। बंकर नहीं थे तो पत्थरों का सहारा लेकर पाकिस्तानी सेना का सामना करते थे। साथियों की लाशें हाथों में देखकर खून खौल जाता था।

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यहीं से शुरू हुई थी पाकिस्तान को धूल चटाने की कहानी। इसी कहानी में छिपा है भारत की जीत का फलसफा। कारगिल युद्ध में 16 दिन तक बिना खाना खाए जंग लड़ने वाले 4/3 गोरखा राइफल के जांबाज हवलदार राजेश मल्ल और अरविंद सिंह थापा ने युद्ध की यादें ताजा कीं।
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जैसे ही युद्ध की सूचना आई तो चंद्रबनी निवासी हवलदार राजेश मल्ल और अरविंद सिंह भी अपनी बटालियन के साथ कश्मीर पहुंच गए। मंजर खौफनाक था। सबसे पहले काले झंडे लगी गाड़ियों से सामना हुआ। इनमें रखी शहीद जांबाजों की लाशें देखकर खून खौल जाता था। 1/11 गोरखा राइफल्स के साथ मिलकर कारगिल युद्ध शुरू किया।
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काश, हमेशा मिले वह इज्जत

बोफोर्स सबसे बड़ा सहारा था। दिन हो या रात, केवल बम और गोलियों की आवाज कानों में गूंजती थीं। एक रात तो मौत से सीधे सामना हुआ। लोग कम थे और पाकिस्तानी फौज सामने से लगातार हमला कर रही थी। इसके बावजूद रातभर मोर्चा संभाला। दोनों दोस्तों ने बताया कि युद्ध के वक्त उन्हें समझाया गया था कि अब देश के लिए जान की बाजी लगाने का वक्त आ गया है। आपके बीवी-बच्चों को देश संभालेगा। अब हथियार ही आपकी बीवी है। यह अंत समय तक आपका साथ देगा। हवलदार अरविंद सिंह व राजेश मल्ल का कहना है कि एक फौजी देश के लिए लड़ता है। जैसा सम्मान कारगिल के दौरान मिला, वैसा ही हमेशा मिलना चाहिए। फौजी ड्यूटी पर जाता है तो अक्सर पूरा रास्ता ट्रेन में खड़े-खड़े काट देता है। 

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