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शहीद सैनिकों को मिलता है भरपूर सम्मान, लेकिन सरकारी मदद का इंतजार करते रह जाता है परिवार

Tue, 26 Feb 2019 09:45 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 26 Feb 2019 09:45 AM IST
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kargil war martyr family lives in poverty
शहीद प्रवीन कुमार थापा के भाई चार बेचकर करते हैं गुजारा

सरहद पर दुश्मनों को नाकों चने चबाने वाले और देश की रक्षा में अपनी जिंदगी को दांव पर लगाने वाले जांबाज सैनिकों को सम्मान तो दिया जाता है लेकिन सरकार की ओर से की जाने वाली घोषणाओं पर अमल नहीं किया जाता है।

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आलम ये है कि दो दशक बीत जाने के बाद भी शहीदों के परिजन सरकार से मदद की आस लगाए हैं। शहीदों और पूर्व सैनिकों की सुविधाओं से जुड़े मसले सरकारी तंत्र में उलझकर दम तोड़ रहे हैं। अमर उजाला ऐसे ही मसलों की गहराई में जाकर उन्हें जिम्मेदारों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। यदि आपके पास भी पूर्व सैनिकों की दिक्कत से जुड़ी कोई भी जानकारी है तो उसे साझा कर सकते हैं।

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चाय बेचकर गुजर बसर कर रहा है शहीद का भाई 

कारगिल में शहीद हुए सिपाही प्रवीन कुमार थापा के भाई नवीन थापा चाय बेचकर गुजर बसर कर रहे हैं। उनको नौकरी देने की सरकार की घोषणा केवल घोषणा बनकर रह गई। इसके अलावा घोषणा के मुताबिक न तो परिजनों को पेट्रोल पंप मिला और न ही जमीन। कारगिल 11 दिसंबर 1998 में आतंकियों से लोहा लेते हुए गोरखा राइफल के सिपाही प्रवीन कुमार थापा शहीद हो गए थे। 

शहर से सात किलोमीटर दूर गल्जवाड़ी, छड़ीवाला निवासी प्रवीन के शहीद होने के बाद कुछ दिनों तक कैंडल मार्च, शोकसभाओं का आयोजन तो किया गया। उस समय सरकार की ओर एक परिजन को सरकारी नौकरी, एक पेट्रोल पंप मिला और जमीन देने की घोषणा की शहीद के भाई नवीन थापा ने बताया कि सरकार की ओर से पेट्रोल पंप, जमीन और नौकरी देने की घोषणा की गई थी लेकिन सालों बाद भी कुछ नहीं मिल पाया।

बचपन से था सेना में जाने का जुनून

इस संबंध में उन्होंने कई बार स्थानीय विधायक से भी बात की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। प्रवीन के मझले भाई विनोद भी सेना से सेवानिवृत्त हो गए हैं। जबकि छोटे भाई नवीन थापा चाय बेचकर गुजर बसर कर रहे हैं। परिजनों को आज भी उम्मीद है कि सरकार की ओर से कोई न कोई सहायता की जरूर की जाएगी। 

शहीद प्रवीन कुमार थापा को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। शहीद के छोटे भाई नवीन ने बताया कि उनके परिवार को बेटे प्रवीन की शहादत पर गर्व है। हालांकि खुद के जुदा होने का दुख भी है। 

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चार साल ही करा पाए शहीद के नाम पर टूर्नामेंट 

शहीद प्रवीन कुमार थापा के भाई नवीन थापा उनकी स्मृति में चार साल ही फुटबॉल टूर्नामेंट करा पाए।

नवीन ने बताया कि चार साल स्थानीय लोगों के सहयोग से शहीद प्रवीन की स्मृति पर फुटबॉल टूर्नामेंट कराया गया, लेकिन पांचवें साल आर्थिक तंगी के चलते टूर्नामेंट नहीं कराया गया। जिसके बाद से टूर्नामेंट ही नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि प्रवीन बहुत अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी थे। राज्य स्तर पर उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते थे। 

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