फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   kargil vijay diwas 2024 Even after 25 years bravery fills with enthusiasm Dehradun BhimRaj participated in war

Kargil Vijay Diwas: 25 साल बाद भी जोश से भर देती है कारगिल की शौर्यगाथा, भीम राज थापा की जुबानी सुनिए कहानी

Fri, 26 Jul 2024 11:11 AM IST
रेनू सकलानी करन सिंह दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
करन सिंह दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 26 Jul 2024 11:11 AM IST
सार

नागा रेजिमेंट से सेवानिवृत्त देहरादून के भीम राज थापा कारगिल युद्ध में शामिल हुए थे। अपनी कहानियां सुनाते हुए वह जोश से भर जाते हैं।

विज्ञापन
kargil vijay diwas 2024 Even after 25 years bravery fills with enthusiasm Dehradun BhimRaj participated in war
नागा रेजिमेंट में नायक के पद से सेवानिवृत्त भीम राज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कारगिल युद्ध भारतीय सेना की अद्भुत शौर्य गाथा को दर्शाता है। इस युद्ध में सैकड़ों वीर योद्धाओं ने अपना बलिदान देकर राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को बरकरार रखा। साथ ही वीर सैनिकों ने दुश्मनों को धूल चटाने का भी काम किया। ऐसे ही कारगिल युद्ध में बहादुरी का परचम लहराने वाले दून निवासी भीम राज थापा कहते हैं कि आज भी 25 साल बाद कारगिल की शौर्यगाथा जोश से भर देती है।

विज्ञापन

आज देश भर में कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में देश के वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ उनके अदम्य साहस को याद कर देशवासी गौरवान्वित महसूस करेंगे।

विज्ञापन


ऐसे ही दून के मोहब्बेवाला निवासी भीम राज अपनी कहानियां सुनाते हुए जोश से भर जाते हैं। नागा रेजिमेंट में नायक के पद से सेवानिवृत्त भीम बताते हैं साल 1999 के जून में वह अपनी बटालियन के साथ जम्मू से होते हुए मुश्कोह घाटी पहुंचे और युद्ध का मोर्चा संभाला।

विज्ञापन
विज्ञापन

बताया, करीब 11 हजार फीट ऊंची इस घाटी में करीब एक महीने से अधिक समय तक कारगिल युद्ध चला। इस दौरान कई साथी जवान जख्मी भी हुए तो कई देश की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति दे चुके थे। बावजूद इसके भारतीय सेना ने हार नहीं मानी और दुश्मनों का जमकर सामना किया। नतीजन भारतीय सेना ने कारगिल में विजय हासिल की।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand: यमुना नदी का रौद्र रूप...अतिवृष्टि से भारी नुकसान, पुल बहने से मध्यमहेश्वर में फंसे कांवड़ यात्री

महीने भर तक न नींद आई न ही खाना खाया गया

पूर्व सैनिक भीम राज थापा की पत्नी अनिता थापा बताती हैं कि जब उनके पति जून में युद्ध के लिए रवाना हुए तो उसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में करीब एक महीने से भी ज्यादा समय तक न नींद आई और न ही खाना खाया गया। इतना ही नहीं युद्ध पर विजय पाने के बाद भी करीब दस दिन के लंबे इंतजार के बाद पति की सलामति की सूचना मिला।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed