कारगिल विजय दिवस: 22 की उम्र में शहीद हुआ था बेटा, भगवान के साथ इस वीर योद्धा की भी पूजा करती है मां
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रोज सुबह मंदिर में भगवान की पूजा होने के साथ ही देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर योद्धा शहीद सुरेंद्र सिंह नेगी की भी पूजा की जाती है। सुरेंद्र के शहीद होने के बाद परिजनों ने अपने बेटे की याद में बड़ोवाला में मंदिर बनवाया हुआ है। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए सिपाही सुरेंद्र सिंह नेगी शहीद हो गए थे।
वीर जवान शहीद सुरेंद्र सिंह नेगी के पिता कर्नल सुजान सिंह नेगी (सेवानिवृत्त) ने बताया कि 22 साल की उम्र में ही सुरेंद्र शहीद हो गए थे। सुरेंद्र का बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना था। वह परिजनों को बिना बताए ही सेना में भर्ती होने के लिए चले जाते थे।
उनकी माता गोमती देवी ने कहा कि बेटे ने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उन्होंने कहा कि सुरेंद्र आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि वह हर सुबह मंदिर में भगवान के साथ ही बेटे की पूजा अर्चना करती हैं। वीर शहीद सुरेंद्र के छोटे भाई भारतीय सैन्य अकादमी में कार्यरत हैं।
शांतिकुंज को दान में दिया मंदिर
शहीद सुरेंद्र सिंह नेगी के नाम से बड़ोवाला में बनाए मंदिर को परिजनों ने शांतिकुंज को दान में दे दिया है। वीर जवान शहीद सुरेंद्र के पिता कर्नल सुजान सिंह नेगी (सेवानिवृत्त) ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ ही मंदिर की देखरेख करने में समस्या आने लगी। जिसके चलते दो साल पहले ही मंदिर को शांतिकुंज को दान में दे दिया गया।
शहीद की मां करती हैं स्मारक की सफाई
प्रेमनगर में बने शहीद सुरेंद्र सिंह नेगी के स्मारक की सफाई उनकी मां गोमती देवी स्वयं ही करती हैं। उन्होंने बताया कि वह सप्ताह में एक बार स्मारक साफ करने आती हैं। स्मारक पर थोड़ी भी गंदगी होने से उन्हें बहुत दुख होता है।
साथ ही समय-समय पर परिजनों की ओर से हर साल स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया जाता है। समाजसेवी बीरू बिष्ट ने बताया कि प्रेमनगर में बने शहीदों के स्मारकों की देखरेख की मांग की गई। लेकिन सरकार द्वारा इस संबंध में कोई काम नहीं किया जा रहा है।