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नोटीफिकशन के अभाव में अटकी कर्णप्रयाग रेल योजना
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 23 Dec 2016 09:13 AM IST
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एक ओर तो चीन अपनी सीमाओं पर फोर लेन सड़कें और हवाई पट्टियां विकसित करने में जुटा है, वहीं रेल मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण परियोजना अभी सरकारी औपचारिकताओं के फेर में ही फंसी है।
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ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे ट्रैक बिछाने और अन्य कार्यों के लिए रेल मंत्रालय 16200 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दे चुका है। अधिग्रहण कानून के तहत तमाम औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी हैं, मगर राज्य के परिवहन विभाग की ओर से इसके लिए अधिसूचना संबंधी गजट नोटीफिकशन किए जाने से मामला अधर में लटका है।
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ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक कुल 125 किलोमीटर की इस महत्वपूर्ण परियोजना की परिकल्पना सबसे पहले ब्रिटिश काल में वर्ष 1928 में की गई थी, मगर उस वक्त यह परवान नहीं चढ़ सकी। बाद में वर्ष 2011 में इसे साकार करने के लिए कदम उठाए गए और चार हजार करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया गया। इसके बाद भी यह मामला ठंडे बस्ते में ही रहा।
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इधर, मौजूदा केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को दोबारा जीवित किया और मल्टीनेशनल कंपनी जियो डाटा से 16200 करोड़ रुपये का फाइनल एस्टीमेट बनवाया। इसे मंजूरी देने के साथ ही वित्तीय स्वीकृति भी दी गई। अत्याधुनिक तकनीकी से बनाए जाने वाला यह रेलवे ट्रैक करीब 105 किलोमीटर लंबी 16 सुरंगों से गुजरेगा, जबकि केवल 20 किलोमीटर क्षेत्र में ही सरफेस पर नजर आएगा।
रेलवे सूत्रों की मानें तो टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली से गुजरने वाले इस रेलवे ट्रैक के लिए भूमि अधिग्रहण एक्ट-13 के तहत लगभग सभी आवश्यक औपचारिकताएं की जा चुकी हैं। इसके तहत जन सुनवाई, इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट और सोशल इंपैक्ट असेसमेंट भी किया जा चुका है। यही नहीं अधिग्रहण की प्रारंभिक सूचना का प्रकाशन भी हो चुका है, मगर एक्ट के हिसाब से राज्य के गजट नोटीफिकेशन होना आवश्यक है।
इसके लिए फाइल बीते तीन माह से नोडल एजेंसी राज्य परिवहन विभाग में अटकी है। रेलवे के अधिकारी बीते दिनों मुख्य सचिव से भी मिले, उन्होंने अनावश्यक देरी पर नाराजगी भी जताई थी। बावजूद इसके अधिसूचना का प्रकाशन नहीं किया जा रहा है।
परियोजना के लाभ
- चीन सीमा पर पहुंच बेहतर होगी। इससे सीमा की सुरक्षा और प्रबल होगी।
- आवश्यक सामाग्री की उपलब्धता बेहतर होगी।
- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
- पहाड़ों से पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।
- परिवहन की व्यवस्था बेहतर होगी और पर्यटन भी बढ़ेगा।
निश्चित रूप से यह परियोजना उत्तराखंड के विकास के लिए बेहतर है। ऐसे में इसे अनावश्यक रूप से रोकने की मंशा किसी की भी नहीं हो सकती है। राज्य सरकार ने खुद एडीएम स्तर के एक अधिकारी को इस कार्य के लिए अधिकृत किया है। अभी इस परियोजना के लिए बजट स्वीकृत हुआ है, जारी नहीं हुआ है। रेलवे के स्तर से हो रही देरी को बेवजह राज्य सरकार पर थोपा जा रहा है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री