भारत-नेपाल सीमा पर जम गई नदी,आर-पार जा रहे लोग
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भारत और नेपाल को विभाजित करने वाली महाकाली का प्रवाह जमे हुए 25 दिन हो गए हैं। कालापानी से लेकर गुंजी तक आठ किलोमीटर के दायरे में नदी जम चुकी है।
स्थिति यह है कि इस दायरे में नदी पर चलकर इसे आसानी से आर-पार किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
अब कालापानी से गुंजी तक 24 घंटे गश्त की जा रही है। इस बार मौसम में बार-बार आए बदलाव के कारण यह नौबत आई है। पिछले वर्षों तक महाकाली का प्रवाह हिमपात के कारण अधिक से अधिक एक सप्ताह तक ही रुकता था।
महाकाली का उद्गम कालापानी से होता है। वहां पर काली का मंदिर भी बना है। गर्मियों में कालापानी में मंदिर के पास नदी का उद्गम तालाब नजर आता है, लेकिन इस समय यह तालाब बर्फ से पूरी तरह पट गया है।
मार्च तक रहेगी यही स्थिति
उससे आगे गुंजी तक बढ़ते हुए नदी की इस समय कोई हरकत नहीं दिखती है। इस बार पहले 16 दिसंबर को नदी जमी थी। बीच में कुछ दिनों तक इसका प्रवाह दिखने लगा, लेकिन पांच जनवरी के बाद लगातार हो रहे हिमपात और तापमान में भारी गिरावट से नदी का मूल स्वरूप गायब हो गया है।
कालापानी से गुंजी तक इस समय तापमान शून्य से 10 डिग्री सेल्सियस नीचे चल रहा है। एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट बरजीत सिंह ने बताया कि इस समय उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम की स्थिति बेहद असामान्य है।
भारी बर्फ के कारण महाकाली जम गई है। इस कारण कालापानी से लेकर गुंजी तक अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। रात में भी इन इलाकों में गश्त की जा रही है। उन्होंने बताया कि मार्च तक यही स्थिति रहेगी। तब तक बार्डर आउट पोस्ट में तैनात जवानों को 24 घंटे गश्त करने के लिए कहा गया है।