जब भगवान शिव के धाम कैलाश में वनस्पतियों की खोज करते-करते वैज्ञानिकों ने ‘शिव-पार्वती’ ढूंढा
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2017 में बीएसआई के विज्ञानियों ने इन नई प्रजातियों का पहला संग्रहण पिथौरागढ़ से किया। कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र में असंख्य बेशकीमती वनस्पतियों का अपार भंडार है।
इनकी खोज में देश-विदेश के विज्ञानी जुटे हुए हैं। इसी क्रम में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को यह उपलब्धि हाथ लगी। बीएसआई के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. प्रशांत पुसालकर और डॉ. डीके सिंह ने पश्चिमी हिमालय में वनस्पतियों के नए वंश के तीन समूहों को खोजा।
इसके अध्ययन के बाद पाया गया कि ये वनस्पतियां केरिओफिलेस कुल की अन्य प्रजातियों से बिल्कुल अलग हैं। नई खोजी गईं वनस्पति प्रजातियां शिव-पार्वती सिलिओलाटा, शिव-पार्वती ग्लेंडुलिजेरा और शिव-पार्वती स्ट्रेचेई को अति विशिष्ट माना जा रहा है।
हिमाच्छादित शिखरों की ढलानों, दर्रों, ग्लेशियर घाटियों के हिमोढ़ों में स्थित एकांत अधिवास में नए वंश की प्रजातियां उगती हैं। अति सुंदर फूलों वाली इन प्रजातियों का यह समूह हिमालय के अधिपति भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित किया गया है।
- डॉ. प्रशांत पुसालकर, वरिष्ठ विज्ञानी, क्षेत्रीय कार्यालय, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण
इस तरह समूह में 10 प्रजातियां हो गईं। ये शिव-पार्वती फोरेस्टी, शिव-पार्वती लड्लोवी, शिव-पार्वती रैमेलाटा, शिव-पार्वती रोडांथा, शिव-पार्वती मोनांथा, शिव-पार्वती मैलांड्रीआईडिस और शिव-पार्वती मैलांडूफोर्मिस हैं।