कैलास यात्रा की संवेदना समझे चीन, अन्य रास्ते खोलने पर भी होगा विचार: तरुण विजय
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भारत चीन फोरम के प्रमुख तरुण विजय ने चीन को दो टूक कहा है कि वह कैलास यात्रा की संवेदना को समझे। उन्होंने कैलास मानसरोवर यात्रा को लेकर हुई चीन के तिब्बत क्षेत्र के सर्वोच्च अधिकारियों, भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों, दिल्ली में चीन दूतावास के मंत्री और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की संयुक्त बैठक में यह बात कही। बैठक में 50 से अधिक कैलास मानसरोवर यात्रियों ने भी हिस्सा लिया।
बैठक की अध्यक्षता सीआईआई भारत चीन फोरम के प्रमुख तरुण विजय ने की। यह अपनी तरह की पहली बैठक थी, जिसमें तरुण विजय ने चीन के अधिकारियों से कहा कि राजनीति, अर्थनीति और कूटनीति से ज्यादा सांस्कृतिक संबंध होते हैं। कैलास मानसरोवर भारत के हिन्दुओं, जैनियों, बौद्धों के लिए जीवन की सर्वोच्च यात्रा है। इसमें किसी भी प्रकार की ढील संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
तरुण विजय ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि उत्तराखंड से नीति माणा, मिलम क्षेत्रों से परंपरागत कैलास मानसरोवर यात्रा होती रही है। इन मार्गों को वुहान भावना के अंतर्गत दोबारा खोलना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को धन्यवाद दिया, जिनके कारण कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए नई विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं।
तरुण विजय ने चीन सरकार को आगाह किया कि मानसरोवर के आसपास बड़े कंक्रीट के होटल न बनाएं, जिससे मानसरोवर क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण का खतरा है। साथ ही हिंदुओं की धार्मिक भावना को भी ठेस पहुंचती है। उन्होंने चीन सरकार द्वारा मानसरोवर में डुबकी लगाने पर प्रतिबंध का विरोध किया। कहा कि यात्रा मानसरोवर में डुबकी के उद्देश्य से ही की जाती है।
तरुण विजय ने ल्हासा में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र खोलने, कैलास यात्रियों की संख्या बढ़ाने, उनको डुबकी लगाने से न रोकने और कैलास के आधार शिविर में भारतीय कैलास सहायता केंद्र खोलने की मांग की, जिसमें एक भारतीय डाक्टर भी रहे। बैठक में चीन की ओर से तिब्बत की सर्वोच्च अधिकारी यांगजों बम्यांग, चीनी दूतावास में उपराजदूत एवं मंत्री ली बिजियां, सीआईआई से चीन कोर ग्रुप के प्रमुख रवि भूतलिंगम, शालिनी थापा और विदेश मंत्रालय के कैलास यात्रा के उप सच्ची शफ मुहम्मद उपस्थित थे।