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जन सुनवाई में भ्रष्टाचार पर उपभोक्ताओं की खरी-खरी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 02 Mar 2016 09:52 AM IST
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विद्युत दरें बढ़ाने से पहले उपभोक्ताओं से सुझाव मांगने के लिए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की जन सुनवाई में लोगों ने खूब खरी-खरी सुनाई।
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मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सभागार में उपभोक्ताओं ने निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोली। आयोग की जन सुनवाई को महज औपचारिकता करार दिया। हाल में अधिकतर कुर्सियां खाली रही। उपभोक्ताओं को उंगलियों पर गिना जा सकता था। अल्पमत में होने के बावजूद उपभोक्ताओं ने अधिकारियों को आइना दिखाने में कसर नहीं छोड़ी।
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उपभोक्ताओं का कहना था कि ऊर्जा निगम विद्युत दरें बढ़ाने के लिए राजस्व घाटे का तर्क देता है। राजस्व बढ़ाने के लिए भी उपभोक्ताओं ने कई सुझाव आयोग को दिए। पैसा लेकर बिजली चोरी कराने की प्रवृत्ति, बिजली के बिल सही और समय पर न वसूले जाने जैसे कारणों से राजस्व घटता है।
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अपराह्न साढ़े तीन बजे आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार और सदस्य केपी सिंह उपभोक्ताओं को सुनने के लिए मंच पर बैठे हैं। सुनवाई में उपभोक्ताओं से ज्यादा आयोग, ऊर्जा निगम, पिटकुल, यूजेवीएनएल और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के अधिकारी मौजूद हैं। एक-एक कर उपभोक्ता सुझाव दे रहे हैं।
देहरादून निवासी अरविंद जैन ने कहा कि ऊर्जा निगम राजस्व घाटे की बात करता है। बिजली बिलों का ऑडिट हो तो बड़े घोटाले पता लगेंगे। वर्षों से एक जगह जमे कई लाइनमैन भ्रष्टाचार बढ़ा रहे हैं। आयोग अध्यक्ष ने इसके लिए लोकायुक्त या अन्य उचित फोरम में शिकायत करने की सलाह दी। इस पर जैन ने बताया कि यह आयोग का विषय है। तर्क दिया कि अनापशनाप योजनाएं शुरू कर बंद कर दी जाती हैं, सब स्टेशनों और विद्युत लाइनें बिछाने के कार्य में देरी से लागत बढ़ती है। लाइनमैन पैसा लेकर बिजली चोरी करते हैं।
इसी तरह रुड़की निवासी कटार सिंह ने भी तर्क दिए। आरोप लगाया कि मीटर रीडर पैसे लेकर रीडिंग कम दर्शाता है। उसका ट्रांसफर होने पर नया मीटर रीडर पुरानी रीडिंग को जोड़ता है। फिर वह बिल घटाने के लिए पैसा वसूलता है। कई व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं से सालों से बिजली बिल नहीं वसूला गया है। आरोप लगाया यह सब निगम की मिलीभगत से हो रहा है। सालों से एक ही बिजली घर में डटे लाइनमैनों को समय-समय पर ट्रांसफर करते रहने की बात पर जोर दिया।
मोहनपुर (दून) निवासी बीरू बिष्ट ने आयोग पर नाराजगी जताई। बीरू बिष्ट ने कहा कि इस बार आयोग ने सुनवाई का उचित प्रचार प्रसार नहीं किया। यही वजह है कि सुनवाई के दौरान कुर्सियां खाली हैं। सुझाव दिया कि दूरदराज से आम उपभोक्ता दून नहीं आ सकता इसलिए हर बिजली घर में सुझाव पेटियां रखी जा सकती हैं।
बिजली बचाने के लिए प्रदेश भर में एलईडी बल्ब वितरित हो रहे हैं, लेकिन सरकारी महकमों, यहां तक कि खुद ऊर्जा निगम में भी, ट्यूब लाइट ज्यादा प्रयोग हो रही है। उपभोक्ता गोविंदराम ने कहा कि बिजली दरों में तो इजाफा हो जाता है, लेकिन सुविधाएं जस की तस हैं। कनेक्शन के लिए जाओ तो कई दिन तक लटकाए रखते हैं। शिकायत करो तो सुनवाई नहीं होती।