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रेप की शिकार युवती मिले तो जोशी 'फसेंगे'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 28 Nov 2013 11:44 AM IST
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नौ मन तेल हो तो राधा नाचे, कुछ यही हाल युवती के यौन उत्पीड़न में फंसे अपर सचिव जेपी जोशी के मामले का है। आरोप गंभीर है। जोशी के खिलाफ महिला संगठन मुखर हैं।
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पता और मोबाइल नंबर नहीं
पीड़ित युवती को न्याय दिलाने की पुरजोर मांग हो रही है। लाख टके का सवाल यह है कि युवती आखिर है कहां? दिल्ली में दर्ज कराई एफआईआर में न तो उसका कोई पता-ठिकाना दिया है न मोबाइल नंबर।
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दिल्ली में जीरो एफआईआर देहरादून में ट्रांसफर हो चुकी है। गेंद राज्य पुलिस के पाले में है। लेकिन राज्य पुलिस आखिरकार किस आधार पर युवती की तलाश करे और आरोपी अफसर के खिलाफ कार्रवाई करे।
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दिल्ली पुलिस जांच नहीं कर रही
टीवी पर दिए बयानों में उत्तराखंड पुलिस के मुखिया बीए सिद्धू तकनीकी सवाल उठाते हैं कि मामले में दिल्ली पुलिस जांच नहीं कर रही। ऐसे में उसके समक्ष धारा 164 के तहत कराए गए युवती के बयान का मतलब क्या है।
अब जब मामला राज्य पुलिस के पास है तो वह युवती से पूछताछ के बाद कार्रवाई करेगी। जब युवती मिले। पूछताछ हो तो जोशी के खिलाफ कार्रवाई हो। वादी जब लापता हो तो न्याय किसके लिए। यह भी एक अहम मुद्दा है?