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Joshimath Sinking: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दर्ज की थी याचिका

Tue, 10 Jan 2023 06:13 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली/देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली/देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 10 Jan 2023 06:13 PM IST
सार

याचिकाकर्ता का कहना है कि जोशीमठ में आज जो भी हो रहा है वह खनन, बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का निर्माण और उसके लिए किए जा रहे ब्लास्ट के चलते हो रहा है। यह बड़ी आपदा का संकेत है। कहा कि नगर में लंबे समय से भू-धंसाव हो रहा है।

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joshimath Sinking case will discuss today in Supreme Court on Swami Avimukteshwaranand filed PIL
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट जोशीमठ संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग करने वाली याचिका को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर मंगलवार को विचार किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जोशीमठ मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इसपर सुनवाई के लिए अब 16 जनवरी की अगली तारीख दी है। 

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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सोमवार को याचिकाकर्ता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से पेश वकील परमेश्वर नाथ मिश्रा से कहा था कि वह मंगलवार को इस मामले को मेंशन करें। मिश्रा ने सोमवार को पीठ के सामने मामला उठाते हुए जल्द सुनवाई का आग्रह किया था। 
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याचिकाकर्ता का कहना है कि जोशीमठ में आज जो भी हो रहा है वह खनन, बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का निर्माण और उसके लिए किए जा रहे ब्लास्ट के चलते हो रहा है। यह बड़ी आपदा का संकेत है। कहा कि नगर में लंबे समय से भू-धंसाव हो रहा है। लोग इसको लेकर आवाज उठाते आ रहे हैं लेकिन सरकार की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका खामियाजा आज एक एतिहासिक, पौराणिक व सांस्कृतिक नगर और वहां रहने वाले लोग झेल रहे हैं।
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यह घटना बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण के कारण हुई है और उत्तराखंड के लोगों को तत्काल वित्तीय सहायता और मुआवजा दिया जाना चाहिए। याचिका में एनडीएमए को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह इस चुनौतीपूर्ण समय में जोशीमठ के लोगों की सक्रिय सहायता करे। सरस्वती ने याचिका में कहा, इन्सानी जान और उनके पर्यावास की कीमत पर किसी विकास की जरूरत नहीं है। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह युद्ध स्तर पर कदम उठाकर इसे रोकें।

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