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अब जिला स्तर पर 50 प्रतिशत आरक्षण
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 20 Nov 2013 08:29 AM IST
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उत्तराखंड सरकार इस बार पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर एक बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में है। महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत सीट रिजर्व होने के कारण राज्य स्तर पर महिलाओं को 50 प्रतिशत से अधिक के आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
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48 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
पिछले चुनाव की इस गलती को सुधारते हुए इस बार छोटे जिलों में पचास प्रतिशत आरक्षण के नियम में रियायत बरतने की तैयारी की गई है। प्रदेश में पचायतों में 95 ब्लॉक हैं। इस लिहाज से प्रदेश में 95 ब्लॉक प्रमुख हैं। प्रदेश में महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस लिहाज से 48 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और 47 अन्य सीटें हुई।
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पर आरक्षण को जिला स्तर पर लागू करने से यह अनुपात बदल जा रहा है। पिछले चुनाव में ही महिलाओं के लिए क्षेत्र चायत में 51 सीट रिजर्व हो गई थीं। इसका कारण यह भी रहा कि जिन जिलों में सम संख्या में सीट हैं वहां आरक्षण स्पष्ट हो जाता है। मसलन देहरादून में छह ब्लॉक हैं तो तीन सीट महिलाओं के लिए रिजर्व करना आसान हो जाता है।
पर विषम ब्लॉक संख्या वाले जिलों में यह अनुपात गड़बड़ा जाता है। मसलन अल्मोड़ा में 11 बलॉक हैं। यहां छह ब्लॉक महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में एक महिला आरक्षित सीट बढ़ जा रही है। इस स्थिति से बचने के लिए इस बार पचास प्रतिशत महिला आरक्षण को राज्य स्तर पर लागू करने का फैसला किया गया है।
नियम में ढील
बड़े जिलों में पुरानी व्यवस्था रहेगी पर छोटे जिलों में इस नियम में थोड़ी बहुत ढील दी जाएगी। मसलन रुद्रप्रयाग में दो की बजाय एक सीट ही रिजर्व की जा सकती है। इसी तरह जिला पंचायत स्तर पर छह महिला सीट इस बार रिजर्व होंगी। हरिद्वार पहले से ही महिला ओबीसी के लिए रिजर्व है। ऐसे में शेष बारह जिलों में छह सीट ही महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
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प्रदेश में विषम ब्लॉक संख्या वाले सात जिले हैं। 95 ब्लॉक के हिसाब से महिलाओं के लिए 48 सीट रिजर्व होनी चाहिए। पर विषम संख्या वाले जिलों में पचास प्रतिशत से कम नहीं का फार्मूला लागू करने पर रिजर्व सीट 51 हो जा रही हैं।
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पंचायत चुनाव में आरक्षण का गुणा भाग शुरू होते ही अब राजनीतिक दलों की चिंता भी बढ़ गई है। पचास प्रतिशत महिला आरक्षण की व्यवस्था होने के कारण राजनीतिक दलों को जिला पंचायत में ही छह सीटों के लिए महिला उम्मीदवारों की तलाश करनी पड़ रही है। जिला पंचायत प्रतिष्ठा का चुनाव भी है, लिहाजा कोई रिस्क लेने से बचने की कोशिश भी है।
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