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कंधे पर लादकर केदारनाथ पहुंचेगी जेसीबी!
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Thu, 07 Aug 2014 01:11 AM IST
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काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी केदारनाथ धाम में जेसीबी मशीन ले जा रहा है। मशीन को एमआई-17 हेलीकाप्टर के बजाय पैदल मार्ग से धाम तक घोडे़-खच्चर और मजदूरों के कंधों पर ढोया जाएगा।
इसके लिए मशीन के पार्ट्स अलग-अलग किए जा रहे हैं। साथ ही धाम में पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री ढोने के लिए निम ने दो एटीवी (आल टरेन व्हीकल) भी पहुंचा दिए हैं।
निम कर रहा है धाम में निर्माण
मालूम हो कि रामबाड़ा से केदारनाथ तक नए पैदल मार्ग का निर्माण कर चुकी निम और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) को प्रदेश शासन ने धाम में अतिरिक्त काम दिए हैं।
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वर्तमान में निम मंदाकिनी, मधु गंगा और स्वर्गाद्वारी नदियों को अपने मूल प्रवाह में लौटाने के बाद बाढ़ सुरक्षा कार्य के साथ-साथ एमआई-26 हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए हेलीपैड और दुकानों का निर्माण कर रहा है। इस काम के लिए निम ने 500 से 600 मजदूर लगाए हुए हैं।
सड़क मार्ग से मशीन ने जाना मुश्किल
अभी तक ज्यादा काम मशीनों के बजाय मानवशक्ति से हो रहे हैं। इसमें लागत के साथ-साथ समय भी अधिक लग रहा है। मोटर मार्ग से 22 किमी दूर होने के कारण यहां मशीनें ले जाना भी काफी मुश्किल है। लेकिन निम इस बाधा को पार करता आया है।
जेसीबी के होंगे 50 हिस्से
निम के जनसंपर्क अधिकारी मनोज सेमवाल ने बताया कि पूर्व में पुलिस एटीवी को निम पैदल मार्ग से धाम तक ले गई है। गत जुलाई माह में निम ने दो एटीवी खरीदी, वह भी पैदल मार्ग से ले जाई गई। अब जेसीबी को भी पैदल मार्ग से ले जाना है।
इसके लिए देहरादून में जेसीबी के पार्ट्स अलग किए जा रहे हैं। इसके लगभग 50 हिस्से होंगे। इनमें सबसे अधिक भारी हिस्सा 250 किलोग्राम का है। उक्त सारा सामान एक-दो दिन के भीतर सोनप्रयाग पहुंच जाएगा। यहां से फिर इसे घोडे़-खच्चर और मजदूर मंजिल तक ले जाएंगे।
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इसके लिए मशीन के पार्ट्स अलग-अलग किए जा रहे हैं। साथ ही धाम में पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री ढोने के लिए निम ने दो एटीवी (आल टरेन व्हीकल) भी पहुंचा दिए हैं।
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निम कर रहा है धाम में निर्माण
मालूम हो कि रामबाड़ा से केदारनाथ तक नए पैदल मार्ग का निर्माण कर चुकी निम और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) को प्रदेश शासन ने धाम में अतिरिक्त काम दिए हैं।
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वर्तमान में निम मंदाकिनी, मधु गंगा और स्वर्गाद्वारी नदियों को अपने मूल प्रवाह में लौटाने के बाद बाढ़ सुरक्षा कार्य के साथ-साथ एमआई-26 हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए हेलीपैड और दुकानों का निर्माण कर रहा है। इस काम के लिए निम ने 500 से 600 मजदूर लगाए हुए हैं।
सड़क मार्ग से मशीन ने जाना मुश्किल
अभी तक ज्यादा काम मशीनों के बजाय मानवशक्ति से हो रहे हैं। इसमें लागत के साथ-साथ समय भी अधिक लग रहा है। मोटर मार्ग से 22 किमी दूर होने के कारण यहां मशीनें ले जाना भी काफी मुश्किल है। लेकिन निम इस बाधा को पार करता आया है।
जेसीबी के होंगे 50 हिस्से
निम के जनसंपर्क अधिकारी मनोज सेमवाल ने बताया कि पूर्व में पुलिस एटीवी को निम पैदल मार्ग से धाम तक ले गई है। गत जुलाई माह में निम ने दो एटीवी खरीदी, वह भी पैदल मार्ग से ले जाई गई। अब जेसीबी को भी पैदल मार्ग से ले जाना है।
इसके लिए देहरादून में जेसीबी के पार्ट्स अलग किए जा रहे हैं। इसके लगभग 50 हिस्से होंगे। इनमें सबसे अधिक भारी हिस्सा 250 किलोग्राम का है। उक्त सारा सामान एक-दो दिन के भीतर सोनप्रयाग पहुंच जाएगा। यहां से फिर इसे घोडे़-खच्चर और मजदूर मंजिल तक ले जाएंगे।