सोनिया-राहुल पर उत्तराखंड में भी फटा 'जयंती बम'
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जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर यूपीए टू की अपनी राजनीतिक हित साधने वाली नीति से उत्तराखंड को करोड़ों का नुकसान हुआ। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंति नटराजन के बयानों से यह बहुत हद तक पुष्ट भी हो रहा है।
उत्तराखंड की जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर उस समय केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के रुख की वजह से प्रदेश की न तो परियोजनाएं पूरी हो पाईं और न ही उन पर काम पूरी तरह से रुक पाया।
कुल मिलाकर जल विद्युत परियोजनाएं प्रदेश के लिए ऐसा निवेश साबित हुईं जिनसे प्रदेश का ऊर्जा हब बनने का सपना पूरा हो सकता था पर यह सपना भी टूटा और निवेशकों को भी नुकसान पहुंचा।
यूपीए टू के कार्यकाल में आठ बड़ी परियोजनाओं को केंद्र ने पर्यावरण स्वीकृति के नाम पर रोक दिया था। इसमे पाला मनेरी और भैरोंघाटी को रोके जाने से प्रदेश को करीब छह सौ करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान था।
कारण की इन दोनों परियोजनाओं में ही काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो गया था।
कॉरपोरेट जगत को रिझाने की ख्वाहिश
विश्लेषकों की माने तो कांग्रेस की प्रो एन्वायरमेंट छवि को बनाए रखने की कोशिश और बाद में कारपोरेट को रिझाने की ख्वाइश का शिकार जयंति नटराजन भी बहुत हद तक हुईं।
जयंती नटराजन के पत्र से भी यह ध्वनित हो रहा है। पर इसकी गाज उत्तराखंड पर गिरी। श्रीनगर की जेवीके कंपनी के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई को हार चुके प्रसिद्ध पर्यावरणविद भरत झुनझुनवाला के मुताबिक कंपनी के प्रति नरम रुख का ही परिणाम रहा कि कंपनी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बाद भी बच निकली।
कंपनी को 200 मेगावाट की स्वीकृति थी और कंपनी 300 मेगावाट की परियोजना बना रही थी। पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 1985 में मिली स्वीकृति में स्पष्ट था कि एक पुराना मंदिर कंपनी को स्थानांतरित करना होगा। पर मंत्रालय ने इस सब बातों पर चुप्पी साध कर रखी।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी के निर्देश पर हुआ काम
जयंती नटराजन कह रही हैं कि धारी देवी और जीवीके पर कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के निर्देश पर काम किया गया। धारी देवी मंदिर की वजह से ही जीवीके परियोजना भाजपा के लिए मुद्दा बन गई थी।
उमा भारती ने धारी देवी को शिफ्ट करने से रोकने के लिए धरने पर बैठने तक का एलान किया था। अब नतीजा यह है कि जीवीके को सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर काम की स्वीकृति दे दी है कि बांध का अधिकतर काम पूरा हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी कमेटी के अध्यक्ष रवि चौपड़ा के मुताबिक कमेटी को कभी मंत्रालय से सहयोग नहीं मिला। यह कमेटी मंत्रालय ने ही गठित की थी। कमेटी के सदस्यों का भुगतान देर से हुआ और रिर्पोट के आधार पर बहस शायद ही हुई हो।
मैं आज तक नहीं समझ पाया कि मुझे अध्यक्ष क्यों बनाया गया। उस समय मेरी जयंती नटराजन से बात हुई थी। मैंने उनसे कहा था कि मेरी जगह चंडी प्रसाद भट्ट को अध्यक्ष होना चाहिए। पर जयंती नटराजन ने कहा कि अध्यक्ष आप ही होंगे। सुप्रीम कोर्ट में भी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बहस नहीं हुई। लिहाजा अब पूछा है कि 24 में से छह बांधों को क्यों रोका जाए। अब पर्यावरण मंत्रालय कह रहा है कि बांधों की वजह से निचले इलाकों में नुकसान हुआ। इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट नाराज भी हुआ था।
- रवि चोपड़ा