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Vikasnagar Landslide: जाखन गांव रहने के लिए उपयुक्त नहीं, भू-वैज्ञानिक ने जिलाधिकारी को सौंपी सर्वे की रिपोर्ट
Wed, 23 Aug 2023 05:10 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, विकासनगर(देहरादून)
संवाद न्यूज एजेंसी, विकासनगर(देहरादून)
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 23 Aug 2023 05:10 PM IST
सार
बीते बुधवार को विकासनगर तहसील अंतर्गत दुर्गम में स्थित जाखन गांव भूस्खलन की जद में आया गया था। 10 मकान जमींदोज हो गए थे।
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भूस्खलन से घर गिरे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुर्गम क्षेत्र में स्थित जाखन गांव सुरक्षा की दृष्टि से रहने के लिए उपयुक्त नहीं है। भू-वैज्ञानिक ने इससे संबंधित सर्वे रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। तहसील प्रशासन ने भी आपदा प्रभावितों को विस्थापित करने के लिए आसपास के क्षेत्र में भूमि तलाशने की कवायद तेज कर दी है। प्रशासन के लिए 28 परिवारों का पुनर्वास किसी चुनौती से कम नहीं है।
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बीते बुधवार को विकासनगर तहसील अंतर्गत दुर्गम में स्थित जाखन गांव भूस्खलन की जद में आया गया था। 10 मकान जमींदोज हो गए थे। दो मकानों को आंशिक क्षति पहुंची थी। सात गोशालाएं ढह गई थी। तब ग्रामीणों ने किसी तरह भाग कर जान बचाई थी। सुरक्षा की दृष्टि से शासन प्रशासन ने गांव को खाली करा दिया था। आपदा से गांव के 28 परिवार प्रभावित हुए थे।
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आपदा प्रभावितों के लिए जूनियर हाईस्कूल पष्टा में राहत कैंप बनाया गया है। प्रधान प्रतिनिधि अंकित तोमर, आपदा प्रभावित जगत सिंह, आनंद सिंह तोमर, जीवन सिंह, सुदामा देवी, मुन्नी देवी का कहना है कि एक झटके में आपदा प्रभावितों ने उनकी पुरखों की मेहनत और कमाई को मिट्टी में मिला दिया। उन्होंने कहा कि गांव का अस्तित्व और संस्कृति बनी रही, इसके लिए सभी आपदा प्रभावितों को एक साथ एक जगह पर बसाया जाए। अधिकांश आपदा प्रभावितों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है।
सभी को मिले एक समान मुआवजा
आपदा प्रभावित सभी 28 परिवारों ने एक सामान मुआवजा देने की मांग की है। पूर्व प्रधान गुमान सिंह ने बताया कि तहसील प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में 10 मकानों को पूर्ण क्षतिग्रस्त बताया है, जबकि शेष मकान खतरे की जद में हैं। गांव रहने लायक नहीं बचा है। ऐसे में सभी प्रभावितों को एक समान मुआवजा दिया जाएगा। सभी मकानों को पूर्ण क्षतिग्रस्त दिखाया जाए। नियमों के मुताबिक पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकान पर 1.30 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर गांव का भू-गर्भीय सर्वे कराया गया था। सर्वे की रिपोर्ट भू-वैज्ञानिक ने जिलाधिकारी को सौंप दी है। जिसमें सुरक्षा की दृष्टि से गांव को रहने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। जिसके बाद आपदा प्रभावितों को नई जगह पर बसाने के लिए भूमि तलाशने की कवायद शुरू कर दी गई है।
- विनोद कुमार, उपजिलाधिकारी