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यहां आशीर्वाद देने आती है आत्मा

Tue, 05 Nov 2013 05:41 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 05 Nov 2013 05:41 PM IST
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jaagar in uttarakhand

अभी तक आपने टीवी सीरियल और फिल्मों में आत्मा को बुलाने की बात सुनी या देखी होगी, लेकिन उत्तराखंड में ऐसा होना बेहद साधारण सी बात है।

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कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में पूर्वजों के मृत होने के बाद उन्हें दोबारा बुलाने और कुल देवी-देवताओं का आह्वान करने के लिए जागर का आयोजन किया जाता है। विशेष पूजा अर्चना कर इन्हें दुसरे व्यक्ति के शरीर में बुलाया जाता है।
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पुरुष या महिला पर अवतरित होती है आत्मा
पूर्वजों की आत्मा जिस व्यक्ति पर आती है उसके लिए विशेष गद्दी लगाई जाती है। इस पूजा से पूर्वजों की आत्मा के साथ ही कुल देवी और देवताओं की आत्मा किसी अन्य पुरुष या महिला पर अवतरित होती है। जिन्हें यहां भगवान मानकर पूजा जाता है।
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जागर शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है जिसका अर्थ है जागना, अर्थात् जागर द्वारा देवी, देवताओं और पूर्वजों को जगाया जाता है। और इनके जागने के बाद पूजा में मौजूद लोग इनसे अपनी परेशानियों का समाधान पूछते हैँ।
यह परमात्मा के न्याय के विचार से जुड़ा हुआ है और एक अपराध के लिए तपस्या की तलाश या अन्याय के लिए देवताओं से न्याय की तलाश के लिए जागर आयोजित किया जाता है।
भजनों के जरिए इन्हें जगाया जाता है। जागर में भजन गाने वाला जागरिया कहलाता है। विशेष पूजा के दौरान जागरिया महाभारत व रामायण जैसे महान महाकाव्यों के लिए संकेतों के साथ देवताओं का गीत गाता है व रोमांच और उनके कारनामे का वर्णन करता है।
अत्यंत असाधारण घटना
कहा जाता है कि हिमालय और प्रकृति के प्रकोप से लगातार जोखिम में रह रहे लोगों ने इस श्रद्धा को सम्मान दिया है। यह अत्यंत असाधारण घटना है और यह कई लोक देवताओं में लोगों को दृढ़ विश्वास से प्रेरित है।
प्राचीन काल में कुमाऊं और गढ़वाल में प्रत्येक परिवार को अपने कुल देवता द्वारा पीड़ा से संतुष्ट किया जाता था। और अच्छा काम करने पर इनाम दिया जाता था। यह जागर इसी से ही प्रभावित है।

जागर दो प्रकार के होते हैं। पहला देव जागर और दूसरा भूत जागर। देव जागर में स्थानिय देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। और भूत जागर में किसी मृत व्यक्ति की आत्मा का आह्वान किया जाता है।
इन सबसे अलग आज जागर को सांस्कृतिक और संगीत विरासत के रूप में देखा जाता है। लेकिन यह अभी भी अत्यधिक विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिष्ठित है। जागर में हुड़का, ढोल, दमाऊ, थाली आदि उपकरणों को प्रयोग किया जाता है। जिन्हें बजाने के बाद ही स्थानिय देवी-देवता अवतरित होते हैं।

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