आईटीबीपी के 16 अफसरों और जवानों को मिलेगा यूनियन होम मिनिस्टर स्पेशल मेडल
- नंदा देवी पर्वत से विदेशी पर्वतारोहियों के खोजने के अभियान में रहे हैं शामिल
- दुनिया का अपनी तरह का पहला कठिन अभियान था डेयरडेविल
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नंदा देवी ईस्ट की चोटी फतह करने के दौरान लापता हुए विदेशी पर्वतारोहियों के शवों की तलाश के लिए चलाए गए ऑपरेशन डेयर डेविल के लिए आईटीबीपी के 16 अधिकारियों और जवानों को यूनियन होम मिनिस्टर स्पेशल मेडल से सम्मानित किया जाएगा। डेयरडेविल दुनिया का अपनी तरह का पहला और सबसे कठिन अभियान था। डीआईजी एपीएस निंबाडिया की ओर से यह जानकारी दी गई।
मई 2019 में नंदा देवी ईस्ट की चोटी फतह करने गए विदेशी पर्वतारोहियों का एक दल लापता हो गया था। हेलीकाप्टर से सर्च अभियान चलाने पर कुछ शव बर्फ में दबे नजर आए थे। लगातार हिमस्खलन होने और बेहद कठिन स्थल होने के कारण शवों को निकालने में सफलता नहीं मिली।
इसके बाद डीएम डा. विजय कुमार जोगदंडे और आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया की संयुक्त बैठक में बर्फ में दबे शवों को निकालने की योजना बनी। इसको ऑपरेशन डेयरडेविल नाम दिया गया था। अभियान के तहत कुशल पर्वतारोही रतन सिंह सोनाल के नेतृत्व में तीन जुलाई को सात शवों को निकालकर लाने में सफलता मिली। यह दुनिया का पहला सबसे कठिन अभियान था।
इस अभियान में शामिल रहे भारत तिब्बत पुलिस के 16 अधिकारियों और जवानों को केंद्रीय गृह मंत्री पदक से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। सम्मानित होने वालों की सूची में डीआईजी एपीएस निंबाडिया, टूआईसी रतन सिंह सोनाल, डिप्टी कमांडेंट अनूप कुमार, इंस्पेक्टर हेमंत गोस्वामी, हेड कास्टेबल देवेंद्र सिंह, कलम सिंह, कपिल देव, प्रदीप पवार, संजय सिंह, सुरेंद्र सिंह, जय प्रकाश, भरत लाल, धीरेंद्र, देवेंद्र सिंह, मंजीत सिंह और भाग्यशाली आदि शामिल हैं।
राज्य सरकार ने नहीं ली कोई सुध
पिथौरागढ़ की नंदा देवी ईस्ट चोटी फतह करने के दौरान लापता हुए विदेशी पर्वतारोहियों के शवों को निकालना आसान नहीं था। लगातार हिमस्खलन आने के कारण कई बार आईटीबीपी के जांबाजों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी थी। इस कार्य के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से टीम के सदस्यों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन अभी तक उत्तराखंड सरकार ने इन जांबाजों की कोई सुध नहीं ली है।