रावत और पूर्व मंत्रियों पर कस सकता है कानूनी शिकंजा
- भाजपा ने बिना अधिकार पद के इस्तेमाल पर घेरना शुरू किया
- राज्यपाल से मिलकर की कानूनी कार्रवाई की मांग
- कहा, पूरे घटनाक्रम में शासन की गोपनीयता भंग हुई
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके पूर्व मंत्रिमंडल के सदस्य एक बार फिर कानूनी फंदे में फंसते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति शासन हटने की उद्घोषणा और हाईकोर्ट के फैसले का आदेश मिले बिना ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद का इस्तेमाल और कैबिनेट की बैठक के फैसले हरीश रावत का सिरदर्द और बढ़ा सकते हैं। भाजपा ने इस मामले में शनिवार को राज्यपाल से मिलकर पूर्व मुख्यमंत्री रावत और उनके पूर्व मंत्रियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा ने सवाल खड़ा किया है कि जब हाईकोर्ट का लिखित आदेश मिला ही नहीं तो किस आधार पर हरीश रावत ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली। उस पर आनन-फानन में कैबिनेट की बैठकें और फैसले लिया जाना किसी साजिश की तरफ इशारा कर रहे हैं।
इससे शासन की गोपनीयता भंग हुई है जो गंभीर अपराध है। भाजपा ने बताया कि इस दौरान शासन के वाहनों का भी तथाकथित मंत्रियों ने इस्तेमाल किया। शासन-प्रशासन के अधिकारी उनकी सेवा में लगे रहे, जिन्हें उस सेवा का अधिकार भी नहीं था।
भाजपा ने कृत्य को बताया अनुच्छेद 357 (2) का उल्लंघन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की अगुवाई में पार्टी पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल राजभवन में राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल से मिला और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के फैसलों को अवैध और असंवैधानिक बताया गया। सभी नीतिगत निर्णयों को संविधान के अनुच्छेद 357(2) का उल्लंघन बताया।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने बताया कि इस स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 356 (2) के तहत पहले राष्ट्रपति शासन हटने की उद्घोषणा होती है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने अवैध रूप से मुख्यमंत्री के पद पर कब्जा कर लिया।
ज्ञापन में कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री और उनके पूर्व मंत्रियों द्वारा शासन के कार्यालयों, सुख-सुविधाओं का दुरुपयोग करने के साथ ही पद से संबंधित गोपनीयता भंग करने का आपराधिक कृत्य किया गया है। राज्यपाल से तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल में विधायक पुष्कर सिंह धामी, त्रिवेन्द्र सिंह रावत, नरेश बंसल, बलजीत सोनी, वीरेन्द्र सिंह बिष्ट, ज्योति गैरोला, डॉ. देवेन्द्र भसीन, खजान दास, उमेश अग्रवाल, नीलम सहगल, सुनील उनियाल, विनय गोयल आदि रहेे।
ये रहे ज्ञापन के अन्य प्रमुख बिंदु
-सूखा प्रभावित किसानों को सहायता दी जाए और प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए।
-चिकित्सालयों और एएनएम सेंटर में फार्मासिस्ट की नियुक्ति हो
- जनसमस्याओं के निस्तारण के संबंध में जल्द कार्रवाई की जाए।
- भूमिहीनों को पट्टे और 684 मलिन बस्तियों का नियमितीकरण किया जाए।
- नैनीसार अल्मोड़ा में जिंदल ग्रुप को दी गई जमीन ग्रामीणों को वापस की जाए।
- चाय बागान में रह रहे श्रमिकों को भूमि पट्टे दिए जाएं।
- बढ़े सर्किल रेट कम किए जाएं।
- पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
- खनन की रॉयल्टी कम की जाए।
- विभागों के खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- एलटी शिक्षकों का रिजल्ट घोषित कर नियुक्तियां शुरू की जाएं।
- शिक्षा विभाग में शिक्षकों की रुकी पदोन्नति शुरू की जाए।
- अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश, अतिथि शिक्षकों की सेवा बहाली पर राज्यपाल का आभार व्यक्त किया गया।
-नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड के करार को रोककर समीक्षा की जाए।