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उत्तराखंडः पहली बार IAS की जगह IPS बने IG जेल
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 19 Dec 2014 12:32 PM IST
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उत्तराखंड गठन के बाद पहली बार महानिरीक्षक कारागार (आईजी जेल) का पद आईएएस से लेकर आईपीएस को दे दिया गया है।
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पुलिस मुख्यालय में तैनात आईजी ट्रेनिंग पीवीके प्रसाद को आईजी जेल बनाया गया है। इनकी रिपोर्टिंग बतौर आईजी जेल प्रमुख सचिव गृह को होगी। ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास है। इससे पूर्व आईजी जेल का पद आईएएस विनोद शर्मा के पास था।
पूरी कवायद के पीछे तर्क है कि यह कदम पुलिस महकमे के साथ बेहतर तालमेल के लिए उठाया गया। इसका मकसद जेल से संचालित होने वाले अपराधों को बंद करना भी है। अब कसौटी पर आईपीएस कैडर है। अगर इसके बाद भी प्रदेश की जेलों के हालात न सुधरे और पुलिस के साथ समन्वय ठीक नहीं रहा तो यह केवल आईएएस बनाम आईपीएस कैडर के वर्चस्व की लड़ाई का प्रतिफल माना जाएगा।
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आईपीएस को यह पद मिलने के बाद दांव पर कैडर की साख है। भूरा की फरारी जैसी हर बड़ी घटना के बाद पुलिस दावा करती थी कि साजिश जेल में रची गई। यह सिलसिला बंद नहीं हुआ तो यह सरकार के प्रयोग की विफलता होगी। जेल से संचालित अपराधों की दुहाई तो पुलिस ने दी लेकिन बाहर हुई वारदातों के बारे में कोई जवाब नहीं था।
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तर्क यह भी दिया गया कि आईजी जेल ऐसा हो जो पुलिस के साथ समन्वय के साथ काम कर सके। लेकिन जिले में तो जेल का संरक्षक डीएम होता है। अब यदि कुल मामला समन्वय का ही है तो मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि प्रमुख सचिव व डीजीपी के बीच और डीएम एसएसपी के बीच समन्वय नहीं है। ऐसे में एक आईजी जेल का प्रयोग कहां तक सफल होगा यह तो वक्त ही बताएगा।
पहले भी हुए समायोजन के नाम पर प्रयोग
कानून व्यवस्था के नाम पर सरकार के अब तक के प्रयोग समायोजन ही दिखे। केवल खुराना को सिर्फ राजनीतिक कारणों से देहरादून के कप्तान पद से हटाकर अजय रौतेला को लाया गया। लेकिन सबसे लचर कानून व्यवस्था उनके दस महीने के कार्यकाल में रही।
एक और प्रयोग हुआ, बीस दिन बाद डीआईजी बनने वाले पुष्पक ज्योति को देहरादून का एसएसपी बनाया गया। अब अफसरों के अपने प्रयोग शुरू हैं। डीआईजी के प्रमोशन वाली डीपीसी को छह महीने टलवाने का प्रयास शुरू हो गया।
हरिद्वार को लेकर भी यही हुआ। अरुण मोहन जोशी के बाद राजीव स्वरूप को भेजा तो हालात इतने बिगड़े कि सात महीने में ही उन्हें हटाना पड़ा। सदानंद दाते को हटाया तो केवल रुद्रप्रयाग की कप्तानी का अनुभव रखने वाली महिला आईपीएस स्वीटी अग्रवाल को हरिद्वार का एसएसपी बना दिया गया। लेकिन हालात ढाक के तीन पात ही रहे।