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उत्तराखंड: करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, आईपीएस कॉलेज का एमडी गिरफ्तार

Wed, 13 Feb 2019 08:41 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 13 Feb 2019 08:41 AM IST
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IPS College MD arrested For scholarship scam in uttarakhand

करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में सोमवार को एसआईटी ने रुड़की के बेड़पुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईपीएस) के एमडी अंकुर शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में वांछित उनका भाई कालेज संचालक विवेक शर्मा फरार है।

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इस संस्थान को छात्रवृत्ति के मद में दो सत्रों में करीब छह करोड़ 28 लाख 94750 रुपये की धनराशि जारी हुई है। एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि जिन छात्र-छात्राओं के नाम पर छात्रवृत्ति हड़पी गई है, उन्होंने यहां से शिक्षा ग्रहण ही नहीं की। 
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पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने छात्रवृत्ति घोटाले में हुई पहली गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसआईटी के इंस्पेक्टर कमल कुमार लुण्ठी ने साक्ष्यों का संकलन करने के बाद सोमवार देर रात अंकुर शर्मा निवासी जुर्स कंट्री सोसायटी ज्वालापुर (मूल ईदगाह, प्रकाश नगर, थाना कैंट, देहरादून) को गिरफ्तार कर लिया। उनका भाई और कालेज संचालक विवेक शर्मा भागने में कामयाब हो गया। एसआईटी द्वारा अंकुर शर्मा को हरिद्वार कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। 

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उन्होंने बताया कि शासन के आदेश पर आईपीएस टीसी मंजूनाथ की अगुवाई में गठित एसआईटी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही है। प्रकरण में दिसंबर 2018 में चंबा के प्रभारी जवाहर लाल ने सिडकुल थाने में छात्रवृत्ति घोटाले का पहला मुकदमा दर्ज कराया था। एसआईटी ने जांच के बाद रुड़की के बेड़पुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईपीएस) में नोटिस चस्पा कर संस्थान के एमडी और संचालक को तलब किया था, क्योंकि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। एसआईटी जांच में पता चला है कि समाज कल्याण विभाग से वर्ष 2014-15 और 2015-16 में 2032 छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति के तौर पर 6,28,94,750 रुपये जारी हुए।

जांच में सामने आया कि जिन छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति जारी हुई है, उन छात्रों ने इस शैक्षणिक संस्थान में कभी शिक्षा ही ग्रहण नहीं की। यही नहीं उनका पंजीकरण तक नहीं हुआ था, लेकिन एक ही बैंक शाखा में इन सभी के नाम के छात्रों के खाते खोल कर ऑनलाइन धनराशि ट्रांसफर की गई । अधिकांश लाभार्थी के मोबाइल फोन नंबर भी एक ही पाए गए। इसके बाद इन कथित छात्रों के बैंक खातों से पैसा सीधे संस्थान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।

आरोप है कि एमडी अंकुर शर्मा, उसके भाई विवेक शर्मा ने फर्जी प्रवेश दिखा कर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र छात्राओं के नाम पर करोड़ों की धनराशि ठग ली है। एसआईटी प्रभारी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि दूसरे आरोपी कालेज संचालक विवेक शर्मा का कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के भी प्रयास किए जा रहे हैं।

पांच सौ करोड़ के घोटाले का अनुमान
प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति की छात्रवृत्ति में करीब पांच सौ करोड़ रुपये के घोटाले का अनुमान लगाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस मामले को सबसे पहले अमर उजाला ने उठाया था। सबसे ज्यादा घोटाला 2011 से लेकर 2016 के बीच हुआ है। लंबे समय से इस घोटाले पर पर्दा डालने की नाकाम कोशिश होती रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आदेश के बावजूद एसआईटी गठन में करीब एक साल का समय लग गया। पहले समाज कल्याण विभाग एसआईटी को पत्रावली उपलब्ध कराने में आनाकानी करता रहा। नैनीताल हाईकोर्ट की फटकार के बाद एसआईटी जांच में तेजी आई है।  

एसआईटी ने कराए तीन मुकदमे 
छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी अब तक तीन मुकदमे दर्ज करा चुकी है। पहला मुकदमा हरिद्वार में दर्ज कराया गया था, जिसमें मंगलवार को आईपीएस कालेज के प्रबंध निदेशक अंकुर शर्मा की गिरफ्तारी हुई है। दूसरा मुकदमा देहरादून के डोईवाला कोतवाली में दर्ज है, जिसमें कम आय के प्रमाण पत्र के आधार पर छात्रवृत्ति हड़पी गई है। तीसरा मुकदमा देहरादून के प्रेमनगर थाने में दर्ज हुआ है। इसकी विवेचना अभी तक शुरू  नहीं हो पाई है।  

घोटाले में अगली बारी किसकी  
छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की कार्रवाई के बाद निजी कालेज संचालकों में अफरातफरी का माहौल है। अब सवाल उठ रहे है कि घोटाले में अब किस प्राइवेट कालेज की बारी है, क्याेंकि कई शिक्षण संस्थानाें के दस्तावेजों के सत्यापन प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। जाहिर है कि जल्द ही आरोपों से घिरे अन्य कालेजों के संचालकाें के खिलाफ भी कार्रवाई का चाबुक चल सकता है।

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