फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Inviting hypothermia out of the house without covering the head in short clothes

सावधान! ठंडक बढ़ने, पारा गिरने के साथ ही बढ़ा हाइपोथर्मिया बीमारी का खतरा

Thu, 09 Dec 2021 12:12 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 12:12 AM IST
विज्ञापन
Inviting hypothermia out of the house without covering the head in short clothes
अगर आप ठंड के मौसम में बिना पर्याप्त गर्म कपड़े के बाहर निकल रहे हैं तो जरा संभलकर! कहीं ऐसा ना हो कि आप हाइपोथर्मिया की गिरफ्त में आ जाए और आपकी जान पर बन आए। थोड़ी सी लापरवाही आपको हफ्तों तक परेशान कर सकती है।
विज्ञापन

हाइपोथर्मिया दरअसल एक व्याधि है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर ठंड से मुकाबला नहीं करने से पैदा होती है। सुबह बिस्तर से निकलकर कम कपड़ों में ही टहलना-घूमना इसे न्योता देता है। इसका असर बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक पड़ता है। कारण, लापरवाही के चलते वे सुबह-शाम कम गर्म कपड़ों के बिना सिर-पैर ढंके घर से निकल जाते हैं। बच्चे खेलने और बुजुर्ग टहलने लगते हैं। उन्हें लगता है कुछ ही देर में धूप की गर्मी से सब ठीक हो जाएगा लेकिन तब तक ठंड उन्हें हाइपोथर्मिया के शिकंजे में जकड़ देती है।
विज्ञापन

दून अस्पताल, कोरोनेशन व गांधी शताब्दी जैसे सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में हाइपोथर्मिया से पीड़ित लोग इलाज करा रहे हैँ। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ केसी पंत का कहना है कि कई मरीजों की हालत गंभीर होती है। कोशिश तो यह होनी चाहिए की ऐसी नौबत ही न आए। कुछ एहतियात बरतकर इससे बचा जा सकता है। कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ एनएस बिष्ट के मुताबिक बहुत अधिक ठंड में बिना गर्म कपड़ों के बाहर निकलने से हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। नदियों, झीलों व बेहद ठंडे पानी के से स्नान करने पर हाइपोथर्मिया हो जाता है। ठंड के मौसम में गीले कपड़े पहनने से भी बीमारी होने की संभावना रहती है। ठंड के मौसम में बहुत अधिक समय तक खाली पेट रहने से भी हाइपोथर्मिया की संभावनाएं रहती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या है लक्षण
-कंपकंपी छूटती है और शरीर का तापमान 95 फॉरेनहाइट से कम हो जाता है।
- बहुत अधिक उलझन महसूस होती है। सांस लेने में तकलीफ होती है।
- मरीज को लगातार नींद आती है। पीड़ित बेहद सुस्त हो जाता है।
- हमेशा कमजोरी महसूस होती है। त्वचा भी रूखी हो जाती है।
- सोचने की क्षमता कम होने के साथ शारीरिक गतिविधियां मंद पड़ जाती हैं।
कैसे करें बचाव
- सिर से लेकर पैर तक गर्म कपड़े पहन कर ही बाहर निकलें।
- ठंडी हवाओं में चहलकदमी से बचें। गीले कपड़े कतई ना पहने।
- गर्दन, कमर और छाती को सिंकाई करें। गर्म चाय या कॉफी पीएं।
- काफी देर तक खाली पेट ना रहे। गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed