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उत्तराखंड की हरीश सरकार में पुनर्नियुक्ति वालों पर गिरेगी गाज!

Mon, 03 Apr 2017 01:08 PM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 03 Apr 2017 01:08 PM IST
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investigation on reappointment in harish rawat government
सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

उत्तराखंड में आयोग-विभागों और मंडी समितियों से नामित पदाधिकारियों को हटाने के बाद अब बीजेपी सरकार ने पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार में जोड़-जुगाड़ से पुनर्नियुक्ति पाने वाले सेवानिवृत्त अफसरों की लिस्ट बनवानी शुरू कर दी है।

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उत्तर प्रदेश की तर्ज पर शुरू हुई इस कवायद में दो दर्जन से ज्यादा अफसरों पर गाज गिर सकती है। दरअसल, ये अधिकारी कई-कई वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त होने के बावजूद लगातार पुनर्नियुक्ति पा रहे हैं। भारी-भरकम सेलरी के अलावा भत्ते और सुविधाएं खर्च करने के बावजूद इनका कोई विशेष योगदान नजर नहीं आ रहा है।
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सेवानिवृत्त होने के बाद किसी योग्य अधिकारी की सेवाएं यदि राज्य या केंद्र सरकार लेना चाहती है तो उसे पुनर्नियुक्ति देने की व्यवस्था है। ऐसे में इन्हें विभिन्न विभागों में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी यानी ओएसडी का पद दिया जाता है। इसके अलावा विभिन्न आयोगों में भी इन्हें रखा जाता है।
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अच्छा वेतन, सरकारी गाड़ी, बंगला और नौकर-चाकर आदि की सुविधाएं भी इन्हें मुहैया होती हैं। इसकी अवधि एक वर्ष या उससे अधिक हो सकती है। यह सरकार के विवेक पर है कि वह उसे बढ़ा भी सकती है। वैसे तो इसका सिर्फ एक पैमाना काबिलियत ही होता है, मगर पुनर्नियुक्ति पाने वाले ज्यादातर लोग सरकार के करीबी माने जाते हैं। उत्तराखंड में तमाम नौकरशाह अपने इसी हुनर के चलते बीते कई वर्षों से पुनर्नियुक्ति पा रहे हैं।

सेवा विस्तार वालों पर भी नजर

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त्रिवेंद्र सिंह - फोटो : AmarUjala

बता दें कि चुनाव के ठीक पहले जब आचार संहिता लागू हुई तो डीएस गर्ब्याल और सीएस नपल्च्याल को सेवानिवृत्ति के पूर्व ही पुनर्नियुक्ति देने के आदेश जारी हुए थे। सूचना विभाग में तो एक ऐसे अधिकारी को पुनर्नियुक्ति मिली, जो विभिन्न अखबारों के पत्रकारों से पूछकर प्रेस विज्ञप्ति तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।

हाल ही में लखनऊ में पुनर्गठन विभाग के ओएसडी मोहन सिंह बिष्ट, विधानसभा में विधि अधिकारी राजेंद्र प्रसाद पंत को भी पुनर्नियुक्ति दी गई। मुख्य सचिव कार्यालय के सूत्रों की मानें तो बीते वर्षों में पुनर्नियुक्ति पाने वाले ऐसे ही तमाम अफसरों की फाइल तलब की गई है।

इसमें यह देखा जा रहा है कि कौन सा अधिकारी कितना योग्य है और उसे सेवानिवृत्ति के बाद जो दायित्व उसे दिया गया, उसमें उसकी परफॉर्मेंस कैसी रही। ऐसे तमाम बिंदुओं का परीक्षण करने के बाद सूची मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जहां से इस पर अंतिम फैसला होगा। सूत्रों की मानें तो लगभग दो दर्जन अधिकारी ऐसे हैं, जिनकी पुनर्नियुक्ति समाप्त करने पर फैसला हो सकता है।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त महेंद्र सिंह नेगी और टीडी बेला को लगातार सेवा विस्तार दिया गया, यानी वे आज तक रिटायर ही नहीं हुए हैं। इसी तरह समाज कल्याण विभाग के निदेशक विष्णु सिंह धनिक को भी करीब डेढ़ साल से सेवा विस्तार दिया जाता रहा। चर्चित छात्रवृत्ति घोटाला उन्हीं के वक्त हुआ, बावजूद इसके उन्हें सेवा विस्तार देकर इसी पद पर बनाए रखा गया। अब ऐसे अधिकारियों पर भी सरकार ने नजर जमा ली है। 

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