फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Intoxicating medicines are available in medical stores in the name of blue red and yellow pills Uttarakhand

नशे की अंधेरी राह: लाल-पीली गोली के नाम पर मेडिकल स्टोर पर मिल रहीं नशे की दवाएं, ठंडे बस्ते में पड़ी ये योजना

Sun, 18 Feb 2024 01:04 PM IST
रेनू सकलानी माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 18 Feb 2024 01:04 PM IST
सार

सरकार ने उत्तराखंड को 2025 तक नशा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया। वहीं जिले में प्रतिबंधित दवाएं मिलने के बाद औषधि विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किया था लेकिन अभी प्रक्रिया शुरू भी नहीं हो पाई है।

विज्ञापन
Intoxicating medicines are available in medical stores in the name of blue red and yellow pills Uttarakhand
drug pill - फोटो : Social Media

विस्तार

मेडिकल स्टोरों पर नशे की दवाओं को लाल, नीली और पीली गोली के नाम से खुलेआम बेचा जा रहा है। इनमें नारकोटिक दवाएं शामिल होती हैं। यही नहीं, कुछ मेडिकल स्टोरों पर इन दवाओं के लिए पर्चा भी नहीं मांगा जा रहा है। इस वजह से शहर में नशे की दवाओं का सेवन बढ़ता जा रहा है।

विज्ञापन


औषधि विभाग की ओर से मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट की अनिवार्यता और मेडिकल स्टोर पर बायोमेट्रिक मशीन लगाने की कवायद अब तक शुरू नहीं हुई है। ऐसे में मेडिकल स्टोर पर निगरानी रखने की तैयारी एक बार फिर ठंडे बस्ते में चली गई है।
विज्ञापन


अवैध दवाएं मिलने के मामले लगातार आ रहे सामने
मेडिकल स्टोर पर ना बायोमेट्रिक मशीनें लगने का काम शुरू हुआ है और ना ही गूगल फॉर्म से डाटा अपलोड किया जा रहा है। जिले में प्रतिबंधित दवाएं मिलने के बाद औषधि विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किया था लेकिन अभी प्रक्रिया शुरू भी नहीं हो पाई है। शहर में नशीली दवाओं और अवैध दवाएं मिलने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। लेकिन औषधि विभाग की ओर से नियमित तौर पर मेडिकल स्टोर की जांच ही नहीं की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट मौजूद है या फिर दुकानदार ही दवाई दे रहा है कुछ जानकारी नहीं रहती है। मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट के नाम पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस ले लेते हैं लेकिन हकीकत तो ये है कि वहां पर फार्मासिस्ट दवाएं नहीं देता है। दवाई देने के लिए निजी कर्मचारी रख लेते हैं और फार्मासिस्ट अन्य जगह पर नौकरी करता है। ऐसे में उसका बिजनेस और नौकरी चलती रहती है।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand: कोटद्वार में मूल निवास स्वाभिमान महारैली..बोले लोग- पूरे पहाड़ में जाएगा आंदोलन का संदेश, तस्वीरें


मौजूदगी अनिवार्य करने के लिए मशीन लगानी थी
औषधि विभाग की ओर से यह कहा गया था जिस तरह से एक ऑफिस में कर्मचारी की अटेंडेंस लगती है उसी तरह से मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट की अटेंडेंस भी लगेगी। ऐसे में बिना फार्मासिस्ट के मेडिकल स्टोर पर दवाई नहीं दी जा सकेगी और फार्मासिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य होगी और इसकी जानकारी डाक विभाग को भी मिलती रहेगी। हालांकि अब तक यह योजना ठंडे बस्ते में है।

बायोमेट्रिक मशीन लगाने और गूगल फॉर्म पर डाटा अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। उच्च अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाएगी, ताकि किसी भी मरीज को बिना पर्चे के दवाएं न दी जाएं। - मानेंद्र सिंह राणा, ड्रग इंस्पेक्टर, देहरादून

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed