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पहाड़ पर पथरीली है कैशलेस अर्थव्यवस्था की राह

Mon, 02 Jan 2017 09:45 AM IST
गौरव मिश्रा/ अमर उजाला, देहरादून
गौरव मिश्रा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 02 Jan 2017 09:45 AM IST
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internet connection will create problem in cashless economy in hilly areas
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सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पाएंगे कि पहाड़ के तीन हजार ग्राम पंचायतों में इंटरनेट सुविधा ही नहीं है। ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर केबल से नहीं जोड़ा गया है। इसलिए नेट बैंकिंग तो यहां पर लगभग नामुमकिन ही है। इसके अलावा भी पर्वतीय अंचल में नेट की स्थिति औसत दर्जे से भी नीचे है।

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फिर पर्वतीय अंचल में बैंकों की शाखाएं बेहद सीमित हैं। उत्तराखंड में पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों की संख्या बहुत कम है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अनुपात में इनकी संख्या बेहद सीमित है। बेहद कमजोर आर्थिक वर्ग और बिना बैंक खातों वाले लोगों के लिए माइक्रो एटीएम की संख्या भी ना के बराबर है।
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सूचना प्रौद्योगिकी सचिव दीपक कुमार का कहना है कि कैशलैस अर्थव्यवस्था को मूर्त रूप देने में समय लगेगा। पर्वतीय इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती नेट कनेक्टिविटी है। इसलिए आईटी का बुनियादी ढांचा मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए मंत्रालय को वस्तुस्थिति रिपोर्ट भेजी गई है। कुछ समय लगेगा लेकिन हालात बेहतर हो सकेंगे। अपर सचिव (वित्त) श्रीधर बाबू अदांकी का कहना है कि कैशलैस अर्थव्यवस्था के लिए हम हर वर्ग के हिसाब से रणनीति बनाकर काम कर रहे हैं।

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इंटरनेट कनेक्शन बहुत बड़ी चुनौती

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पहाड़ी जिलों में इंटरनेट कनेक्शन बहुत बड़ी चुनौती है। इसलिए हमारे सामने विमुद्रीकरण के बाद कैशलैस अर्थव्यवस्था का फैलाव एक बड़ी चुनौती है। वहीं कैशलैस अर्थव्यवस्था को मूर्त रूप देने वाली सरकारी कंपनी भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के वाइस प्रेजीडेंट और बिजनेस डेवलपमेंट हेड अनूप नायर ने बताया कि उत्तराखंड में ढांचागत चुनौतियां पहाड़ जैसी हैं।

फिर यहां पर आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर हैसियत रखने वाला वर्ग भी है। हालांकि यहां साक्षरता दर काफी बेहतर है जो लोग निरक्षर और अर्द्धसाक्षर हैं उन्हें इसके दायरे में लाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कई मॉडल तैयार करने की जरूरत है। उत्तराखंड में माइक्रो एटीएम से दूरस्थ इलाकों में बिना खाते वाले लोगों को कैशलेस वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। लेकिन अभी इसके आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं। राज्य में भी आबादी के बड़े हिस्से में बैंक खाते नहीं हैं।  

नकदी वित्तीय लेनदेन में ग्राहक-व्यापारी पर कोई अलग से लागत नहीं आती। केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार आज 31 दिसंबर तक नेट लेनदेन में शुल्क माफ था। लेकिन इसके बाद (एक या दो जनवरी) से शुल्क को लेकर क्या व्यवस्थाएं होंगी किसी को कोई जानकारी नहीं है। इसको लेकर सबसे अधिक चिंता छोटे व्यापारी हैं। राशि के हिसाब से कितना शुल्क लिया जाएगा इसको लेकर बेचैनी भी है।

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