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हरिद्वार : गंगा के समानांतर बहती रही योग की ‘गंगा’, साधकों की प्राचीन कर्मस्थली हैं उत्तराखंड के ये दो नगर

Mon, 21 Jun 2021 03:30 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 21 Jun 2021 03:30 PM IST
सार

हरिद्वार और ऋषिकेश की यह तपोभूमि प्राचीनकाल से योग का गढ़ रही है।

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international yoga day 2021 : yoga flowing parallel to Ganga, these two cities of Uttarakhand are the ancient places of yoga worship
गंगा के समानांतर योग प्राणायाम की गंगा बहती रही है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत से निकलकर महाऋषि पतंजलि का अष्टांग योग दुनियाभर में बहुत पहले पहुंच गया था। अध्यात्म की इस प्राचीन मायापुरी में सदा से गंगा के समानांतर योग प्राणायाम की गंगा बहती रही है। पांच वर्ष पहले योग को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिला। योग गुरु स्वामी रामदेव ने इसमें अहम भूमिका निभाई। 

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हरिद्वार और ऋषिकेश की यह तपोभूमि प्राचीनकाल से योग का गढ़ रही है। महंत श्रवणनाथ, स्वामी शांतानंद, स्वामी धर्मानंद, राममुलख दरबार के जाने माने योगी प्रो. एमलाल, शिवानंद, ओमकारानंद, स्वामी नारायणानंद, श्रीराम शर्मा आचार्य, श्यामलाल, केशवदेव, महान योगी सत्यानंद, गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद सहित कई तपस्वियों ने इस पावन भूमि पर ऋषियों ने ध्यान साधना की।
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अष्टांग योग का प्रकाश इसी धरती से विश्वभर में फैलाया। 120 वर्ष पूर्व श्रद्धानंद द्वारा बसाया गुरुकुल और 1907 में महामना मदनमोहन मालवीय की ओर से स्थापित ऋषिकुल शिक्षा के साथ योग साधना के बड़े केंद्रों के रूप में उभरे। कृपालु महाराज और स्वामी शंकरदेव की योग धारा को इस मुकाम तक लाने का काम स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने 1995 में शुरू किया। 

हरिद्वार का सप्तसरोवर क्षेत्र बसाने वाले आदि सप्तऋषियों ने तो अति प्राचीनकाल में यहां योग साधना का प्रतिपादन ज्ञान साधना के साथ किया। उन ऋषियों में भारद्वाज, जमदग्नि, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ आदि प्रमुख हैं।

इन ऋषियों ने तो योग साधना को आत्मा के प्रकाश का मुख्य माध्यम माना था। प्राण शक्ति को योग के साथ जोड़कर ऋषियों ने हरिद्वार की इसी प्राचीन भूमि पर अनेक प्रयोग किए।

ऐसा ही काम बाद में कनखल संन्यास मार्ग स्थित अनेक आश्रमों में हुआ। एक जमाने में कनखल नगरी आयुर्वेद का बहुत बड़ा केंद्र थी। यहां योग और आयुर्वेद के योग से बहुत बड़े काम हुए। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस नगरी में अनेक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

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