अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: जहां जीतने को बेताब बेटियां, श्वेता ने पिता के सपने को हकीकत में बदला
क्रिकेट को जुनून की हद तक चाहने वाले पिता के सपने को बेटी श्वेता वर्मा ने हकीकत में बदल दिया है। बेटी की इस कामयाबी के बीच मां कमला का भी अहम योगदान है। अंतिम दिनों में पति ने उनसे बेटी को क्रिकेटर बनाने का वादा लिया था।
यह भी पढ़ें... अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: स्वर्णिम पंच जड़ना ही है बॉक्सर शोभा का मकसद, पढ़ें ऐसी ही कुछ और होनहार बेटियों की कहानी
टीम में चयन होने की खबर मिली तो मां और बेटी की आंखों से आंसू छलक उठे
यही वजह है कि जब श्वेता के टीम में चयन होने की खबर मिली तो मां और बेटी की आंखों से आंसू छलक उठे। कमला को एक ही मलाल है कि बेटी को अंतरराष्ट्रीय मैच खेलता हुआ देखने के लिए पति अब इस दुनिया में नहीं है।
बचपन से पिता को क्रिकेट खेलते देखतीं थीं श्वेता
थल बाजार निवासी श्वेता बचपन से पिता स्व. मोहन वर्मा को क्रिकेट खेलते देखतीं थीं। ऑलराउंडर पिता मोहन बेटी श्वेता को क्रिकेटर बनाना चाहते थे। श्वेता की मां कमला वर्मा (58) आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।
पिता के सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की
विशेष बातचीत में कमला ने बताया कि डेढ़ साल पहले उनके पति मोहन की मृत्यु हो गई थी। अंतिम दिनों में वह कहते थे कि अब बेटी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी तुम्हारी ही है। इसलिए उन्होंने बच्चों के लिए कभी कमी नहीं होने दी।
कोच लियाकत अली से क्रिकेट की बारीकियां सीखीं
वह बेटी को लगातार प्रेरित करती रहीं और इंटर के बाद बेटी श्वेता को अल्मोड़ा भी भेजा। वहां पर कोच लियाकत अली से श्वेता ने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। श्वेता ने भी मां की मेहनत और पिता के सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की।
मां कमला ने उम्मीद जताई कि श्वेता टीम में अच्छा प्रदर्शन कर देश का नाम जरूर रोशन करेगी। उन्होंने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि बेटियों को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ खड़े रहें। श्वेता के बड़े भाई मोहित की थल में कॉस्मेटिक्स की दुकान है। इसलिए लोग उन्हें भी बधाई दे रहे हैं।