अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 : गुमनाम नायिका सैकड़ों बच्चों को दे रही पहचान
- अपनी ममता की छांव में कई बच्चों का भविष्य संवार रही अदिति पी कौर
- संपन्न परिवार की होने के बावजूद चुना सादगी का जीवन, अब हैं पर्वतीय बाल मंच की अध्यक्ष
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एक ऐसी गुमनाम नायिका जिसकी ममता की छांव ने कई बच्चों की किस्मत को बदला। सादगी, ममता, सहजता और मातृशक्ति की मिसाल अदिति अविवाहित हैं, लेकिन असल मायनों में वे एक मां की भूमिका निभा रही हैं। पहाड़ के दूरस्थ जिन गांवों के बच्चे ठीक से अपना नाम बताने में भी हिचकिचाते थे, वह आज विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम कमा रहे हैं। बच्चों की अंगुली थाम कई परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अपने हक के लिए लड़ना सीखा रही हैं अदिति।
एक संपन्न परिवार से होने के बावजूद अदिति पी कौर ने सादगी का जीवन चुना। अदिति की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब वह पहली बार टिहरी के एक गांव में पहुंचीं। यहां अदिति ने संपन्न परिवारों व गरीब परिवारों के बच्चों के बीच के अंतर को महसूस किया। बतौर अदिति मैंने वर्ष 1997 में श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम, टिहरी गढ़वाल में सिरिल आर राफेल से मुलाकात की। वह मेरे लिए एक गॉडफादर की तरह थे।
उन्होंने मुझे बताया कि हम अपने समाज में बदलाव कैसे ला सकते हैं। यह जाना कि पहाड़ के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों को एक मंच की आवश्यकता है। इसके बाद तीन साल यहीं रुक गईं। इसके बाद पहाड़ की परिस्थितियों, यहां के बच्चों व समुदायों को समझा। अदिति बताती हैं कि इन सालों में मैंने अपने आप में कई बदलाव महसूस किया। आखिर में मैंने पहाड़ के बच्चों (जरूरतमंदों) के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया। बच्चों की मुस्कान मुझे एक नई ऊर्जा देती है।
पबम से दी बच्चों को नई दिशा, 2000 से अधिक बच्चे जुड़े
पर्वतीय क्षेत्र के बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने व उनके मार्गदर्शन के लिए 24 सालों से अदिति बच्चों के साथ काम रही थीं, लेकिन वर्ष 2000 में पर्वतीय बाल मंच (पबम) की स्थापना की गई। इसके बाद उत्तराखंड के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर बच्चों को उनके अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का काम अदिति ने शुरू किया।
गांव स्तर के बच्चों के समूह स्थापित किए गए और फिर बाल अधिकारों, बाल सहभागिता, बाल संरक्षण, भेदभाव, सूचना का अधिकार, स्वच्छता, जन्म पंजीकरण आदि के बारे में बच्चों को खेल के जरिए समझाया। वर्तमान में वह देहरादून के विकासनगर, चमोली जिले के घाट ब्लाक सहित विभिन्न जिलों में 2000 से अधिक बच्चों के साथ काम कर रही हैं। अब वह पर्वतीय बाल मंच की अध्यक्ष हैं।
होटल मैनेजमेंट छोड़ बच्चों की आवाज बनने का उठाया बीड़ा
अदिति का बचपन और प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल में हुई। अदिति की मां एक कलाकार हैं और पिता भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड न्यूट्रिशन, लखनऊ से होटल मैनेजमेंट में स्नातक किया और इसके बाद ताज पैलेस, मौर्य शेरेटन, दिल्ली और भोपाल के आमेर पैलेस में काम किया है, लेकिन अदिति का नौकरी में मन नहीं लगा। उन्हें तो बच्चों की आवाज बनना था।
छोटे से लेकर बड़े बच्चे तक स्वागत को रहते हैं तैयार
अदिति लोगों के लिए गुमनाम हों, लेकिन वह उन बच्चों के लिए आदर्श है, जिनके लिए वह भाग्यविधाता बनीं हैं। गांव में अदिति के आने की खबर मिलते ही बच्चे फूल मालाओं के साथ उनके स्वागत को तैयार रहते हैं।