यहां छोटे से इलाके में ही अपनी हुकूमत चलाते हैं बाघ, इस तरह निभाते हैं भाईचारा
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उत्तराखंड के बाघों का अन्य जगह के रहने वालों बाघों की तुलना में ज्यादा ‘भाईचारा’ है। वह छोटे इलाके में ही अपनी-अपनी हुकूमत चला रहे हैं। वन विभाग का दावा है कि छोटा क्षेत्र होने के बाद भी अपसी संघर्ष तुलनात्मक तौर पर कम है।
उत्तराखंड के कार्बेट पार्क में 208 बाघ और छह शावकों की गिनती कैमरा ट्रैप से हुई है। इस तरह तराई पश्चिमी वृत्त (रामनगर, हल्द्वानी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी वन प्रभाग) में 119 बाघों का वास है।
कार्बेट पार्क के उप निदेशक अमित वर्मा बताते हैं कि दक्षिण का एक बाघ करीब 10 स्क्वायर किमी एरिया (एक स्क्वायर किमी में 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल) में रहता है। इसी तरह अगर साइबेरिया की बात करें तो वहां एक बाघ का 400 स्क्वायर किमी तक का एरिया होता है।
जबकि कार्बेट पार्क के बाघ करीब छह स्क्वायर किमी के एरिया में भी आसानी से रह रहे हैं। इसका एक कारण बेहतर वास स्थल और उनके खाने की प्रचुरता होना है।
इसके कारण वह ज्यादा खुश हैं, उनके बीच आपसी संघर्ष के मामले भी कम हैं। अभी कार्बेट पार्क अच्छी-खासी बाघों की संख्या को संभाल सकता है। तराई पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार हैबीटेड सुधार और सुरक्षा के जो कार्यक्रम चलाए गए थे, उसका लाभ दिखाई दे रहा है। हर तरह के वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है।
नेपाल के साथ होगी संयुक्त गश्त
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के वरिष्ठ वैज्ञानिक विभाष पांडव ने बताया कि बाघ वृक्षों पर पंजे के निशान और मूत्र से अपनी सीमा क्षेत्र बनाता है, जो दूसरे बाघों को बताने के लिए होती है। अगर जंगल अच्छा है, उसमें शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या अच्छी-खासी है तो वह छोटे इलाके में भी आराम से रह सकते हैं।
नेपाल के साथ होगी संयुक्त गश्त
वन विभाग ने बाघों की सुरक्षा के लिए नेपाल और उत्तर प्रदेश दोनों के साथ बातचीत की है। तराई पूर्वी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी नीतिशमणि त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के साथ बातचीत हो गई है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व और तराई पूर्वी वन प्रभाग की टीम रोस्टर के हिसाब से एक-दूसरे इलाके में संयुक्त गश्त करेगी। इसी तरह नेपाल के साथ बातचीत कर गश्त और सुरक्षा को लेकर अन्य कदम उठाये जाएंगे।