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मातहत मस्त, हाकिम पस्त
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 05 Oct 2013 06:16 PM IST
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अभी तक हाकिम का जलवा रहता था। उनके इशारों के कई-कई मतलब निकाल कर मातहत काम पर जुट जाते थे। लेकिन खाद्य सुरक्षा योजना के चक्कर में पहिया उलटा घूमने लगा।
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योजना के काम का बोझ देखकर भी मातहत मस्त रहे। नतीजा-नौ दिन चले अढ़ाई कोस। मातहतों ने हाकिम के इशारे का क्या डांट का भी कोई मतलब नहीं निकाला, सब मस्त रहे। काम का पहाड़ सामने है।
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अब हाकिम कह रहे हैं कि चना भले ही न फोड़ पाया हो लेकिन वह अकेले ही ‘भाड़’ फोड़ेंगे।