अंतर राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप: गोल्डन गर्ल अंकिता ने खेतों व सड़कों पर प्रैक्टिस कर जीता पदक
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की ओर से पटियाला में आज से ही शुरू हुई चैंपियनशिप में अंकिता ने 16 मिनट 58. 07 सेकेंड में अपनी दौड़ पूरी की।
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सिंथेटिक ट्रैक न मिलने से खेतों और सड़कों पर प्रैक्टिस करने वाली उत्तराखंड की गोल्डन गर्ल अंकिता ध्यानी ने 60वीं अंतर राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीत लिया।
चैंपियनशिप में अंकिता से पहले उत्तर प्रदेश की पारुल चौधरी ने 16 मिनट, 04.07 सेकेंड की टाइमिंग निकालकर स्वर्ण और महाराष्ट्र की कोमल चंद्रकांत त्यागी ने 16 मिनट 26.89 सेकेंड का समय निकालकर रजत पद जीता। उत्तर प्रदेश की पूजा 17 मिनट 0.15 सेकेंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रहीं।
पौड़ी जिले के जयहरीखाल प्रखंड के अंतर्गत ग्राम मेरूड़ा निवासी अंकिता ध्यानी पहले भी कई पदक जीत चुकी हैं। बताया कि 1500 मीटर और 5000 हजार मीटर इवेंट में इसी साल फरवरी माह में गुवाहाटी में हुई जूनियर नेशनल स्पर्धा में अंकिता ने स्वर्ण पदक जीता था। एलपीयू में पीटीई प्रथम वर्ष की छात्रा अंकिता ने इससे पहले अगस्त्यमुनि खेल छात्रावास में रहने के दौरान कई प्रतियोगिताओं में प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
उन्होंने फरवरी 2021 में गुवाहाटी में हुए जूनियर नेशनल में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इससे पहले जनवरी 2021 में भोपाल में आयोजित जूनियर फेडरेशन कप और जनवरी 2020 में गुवाहाटी में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में भी अंकिता ने नए मीट रिकॉर्ड के साथ दो-दो स्वर्ण पदक जीते।
कई बार की गई अभ्यास के लिए सिंथेटिक ट्रैक की मांग
उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव केजेएस कलसी ने बताया कि अंकिता की प्रैक्टिस के लिए कई बार सरकार से सिंथेटिक ट्रैक की मांग की गई, लेकिन उनकी मांग को अनदेखा किया गया। ऐसे में अंकिता ने खेतों व सड़कों पर प्रैक्टिस कर यह मुकाम हासिल किया है।
शूटर दिलराज की मदद करेगा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
गुरबत में जी रहीं अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक शूटर दिलराज कौर की मदद के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण आगे आया है। प्राधिकरण की जिला सचिव नेहा कुशवाहा ने शुक्रवार को दिलराज कौर से बातचीत कर उन्हें मदद का भरोसा दिलाया। सदस्य सचिव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण राजीव कुमार खुल्बे ने कहा कि इस संबंध में जल्द ही राज्य सरकार से वार्ता की जाएगी।
बता दें कि दिलराज कौर एक अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक शूटर हैं। वह अब तक विभिन्न प्रतियोगिताओं में 26 गोल्ड, 08 रजत, 3 कांस्य पदक जीत चुकी हैं। दिलराज ने विभिन्न पैरा राष्ट्रीय व शूटिंग वर्ल्ड कप में टेक्निकल अफसर के रूप में भी कार्य किया है, लेकिन वर्तमान में दिलराज गुरबत में जीने को मजबूर हैं।
वह अपनी मां के साथ किराये के मकान में रहती हैं और कोरोना काल में फुटपाथ पर नमकीन-बिस्किट बेचकर जीवन यापन कर रही हैं। हैरत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने के बाद भी आज तक राज्य सरकार की ओर से दिलराज को कोई सम्मान नहीं दिया है। दिलराज कौर की हालत का अब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने संज्ञान लिया है और तत्काल जिला विधिक प्राधिकरण को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
नेहा कुशवाहा ने फोन पर दिलराज से बात की और अविलंब पराविधिक कार्यकर्ता जहांगीर आलम को उनके घर भेजकर बातचीत करने को कहा। नेहा कुशवाहा ने कहा कि यदि दिलराज को भविष्य में कोई विधिक सहायता की आवश्यकता होती है तो वह जिला विधिक प्राधिकरण से संपर्क कर सकती हैं।