नारी निकेतन का ऐसा सच जान सन्न रह जाएंगे
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नारी निकेतन संवासिनियों की कब्रगाह सा बन गया है। पिछले तीन साल में यहां 11 से अधिक संवासिनियों की मौत हो चुकी है। इससे भी हैरान कर देने वाली बात यह है कि आमद पर सामान्य होने वाली समाज से पीड़ित 50 फीसदी से अधिक महिलाएं एक से डेढ़ महीने बाद असामान्य हो गईं।
समाधान दलित महिला हेल्प लाइन की ओर से यह दावा किया गया है। संस्था की अध्यक्षा रेणु डी सिंह के मुताबिक नारी निकेतन में महिलाओं की सही देखभाल के बजाए उनका उत्पीड़न हो रहा है।
समाज से उत्पीड़ित महिलाओं की अभिरक्षा में मौत ने लोगों को झकझोर दिया है। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 में नारी निकेतन में 10 संवासिनियों की मौत हो गई, जिनकी उम्र उम्र 20 से 35 वर्ष थी। इसके बावजूद शासन-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
नोट
समाधान संस्था ने अमर उजाला को शुक्रवार रात यह जानकारी उपलब्ध कराई। आरोप चौंकाने वाले हैं। समय कम होने की वजह से हम इन्हें क्रास चेक नहीं कर सके, लिहाजा अमर उजाला इन तथ्यों की सच्चाई का कोई दावा नहीं करता। चूंकि आरोप गंभीर हैं, इसलिए इन्हें सबके सामने लाना हमारा नैतिक दायित्व है। शासन-प्रशासन को इसकी गहराई से जांच करानी चाहिए, जो भी सच्चाई सामने आएगी हम उसे भी प्रकाशित करेंगे।
जिस सब्जी में उल्टी की, उसे ही खिला दिया
कड़ाके की ठंड में देखरेख के अभाव में शुक्रवार और उसके बाद शनिवार को एक और संवासिनी की मौत हो गई। दो दिनों में दो संवासिनियों की मौत से नारी निकेतन की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। समाधान संस्था की अध्यक्ष के मुताबिक उनके पास पुराने मामलों के कुछ संवासिनियों की रिकॉर्डिंग है, जिसमें संवासिनियों ने नारी निकेतन में होने वाले उत्पीड़न को बयां किया है।
रिकॉर्ड के मुताबिक
रेणु डी सिंह के मुताबिक एक संवासिनी ने बताया कि वह बीमार थी, इसके बावजूद उसे सब्जी बनाने को कहा गया। सब्जी बनाते हुए उसने कड़ाही में उल्टी कर दी, इसी सब्जी को उसे एवं अन्य संवासिनियों को जबरन खिलाया गया।
आने के एक माह बाद हो जाती हैं असामान्य
संस्था की अध्यक्षा का दावा है कि नारी निकेतन में आमद पर जिन महिलाओं की मानसिक स्थिति वहां सामान्य दर्ज है, उनके साथ इतना उत्पीड़न होता है कि एक से डेढ़ महीने बाद वह असामान्य हो जाती हैं।
इन संवासिनियों की हुई मौत, उठी जांच की मांग
संवासिनियों की मौत सरकारी तंत्र की विफलता है। समाज से पीड़ित महिलाओं को यहां रखा जाता है, लेकिन वह यहां भी सुरक्षित नहीं हैं। सरकार महिला आयोग की मॉनिटरिंग कमेटी बनाकर हर सप्ताह व्यवस्थाओं की जांच करे।
-चंद्रशेखर तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
इन संवासिनियों की हुई मौत
नारी निकेतन में नीना, सुखिया, मैरीना, रेनू, प्रिया, अमशोली, उषा, सुरजी, हिना और रानी की कुपोषण, लीवर संक्रमण आदि कारणों से मौत हुई। सभी संवासिनियां मरणासन्न अवस्था में दून अस्पताल लाई गई थीं।