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अब बीमार आम के पेड़ों पर भी लगेंगे 'रुपए'

Tue, 17 Dec 2013 01:55 PM IST
अमर उजाला, विकासनगर
अमर उजाला, विकासनगर Updated Tue, 17 Dec 2013 01:55 PM IST
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insecticide will save mango tree

अब आम उत्पादकों को नुकीली गांठ कीट से डरने की जरूरत नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों ने कीट पर नियंत्रण पाने के लिए दवा खोज ली है।

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दवा छिड़कने से बीमार आम के पेड़ भी स्वस्थ होंगे और खूब फल देंगे। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी और केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ के शोध में पता चला है कि कीटनाशक प्रोफेनोफॉस और थायोमिथेक्सॉस के घोल को मिलाकर इसका छिड़काव करने से कीट पर नियंत्रण में 70-80 प्रतिशत सफलता मिलती है।
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केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ पादप रक्षा विशेषज्ञ डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि महज देहरादून जिले में ही 200-250 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले आम के उद्यान नुकीली गांठ के प्रकोप में हैं।
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इसके साथ ही नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, अल्मोड़ा, पौड़ी और टिहरी जिले में भी इसका प्रकोप है। अध्ययन में पता चला है कि कीट से उत्पादन में 70-80 प्रतिशत की क्षति होती है। जनपद में इसका सबसे ज्यादा प्रकोप विकासनगर, कालसी और सहसपुर विकासखंड में देखा गया है।


बाग को मिला नया जीवन
विकासनगर विकासखंड अंतर्गत बाड़वाला गांव निवासी मोहम्मद फारुख के 21 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले बाग में 2100 आम के पेड़ों में नुकीली गांठ कीट का प्रकोप था। जिस कारण उन्हें इतने बडे़ क्षेत्रफल में महज 7-8 लाख रुपए का फल मिलता था।

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लेकिन कीट का प्रकोप समाप्त होने पर उन्हें आने वाले सीजन में 30-32 लाख रुपए का लाभ होने की उम्मीद है। डा. एसएस सिंह की सलाह पर उन्होंने दो लीटर पानी में दो मिलीलीटर प्रोफेनोफॉस और एक ग्राम थायोमिथेक्सॉस मिलाकर घोल बनाया।

सितंबर माह में 15 दिनों के अंतराल में दो दिन बाग में घोल का छिड़काव किया। अक्तूबर, नवंबर माह में ही बाग स्वस्थ होने लगा। आम के पेड़ों को नवजीवन मिलने से उन्हें इस बार अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है।

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