डीजीपी सिद्धू मुश्किल में, स्वतंत्र एजेंसी कर सकती है जमीन मामले की जांच
- डीएम ने स्वतंत्र एजेंसी से विस्तृत जांच की सिफारिश की
- रिजर्व फारेस्ट की जमीन खरीदने के मामला, प्रशासन ने जांच रिपोर्ट सीएस को भेजी
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जिला प्रशासन ने डीजीपी बीएस सिद्धू द्वारा रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन खरीदने के मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। यह जांच मुख्य सचिव के आदेश पर की गई है। जांच रिपोर्ट में तमाम गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए डीएम ने किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की संस्तुति की है। डीएम की जांच रिपोर्ट पर शासन में मंथन शुरू हो गया है।
भाजपा नेता रविंद्र जुगरान के शिकायती पत्र पर मुख्य सचिव ने करीब डेढ़ माह पहले डीएम देहरादून रविनाथ रमन को इस मामले में जांच करने को कहा था। जांच रिपोर्ट में डीएम ने पीएचक्यू के आदेश पर डिप्टी एसपी स्वतंत्र कुमार सिंह द्वारा की गई उस जांच का हवाला भी दिया जिसमें इस खरीद में हुई गड़बड़ियों का खुलासा किया था।
बतौर मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने एनजीटी में दिए शपथपत्र में गलत तरीके से जमीन की खरीद फरोख्त होने की बात कही। इसके अलावा तत्कालीन कमिश्नर सुबर्द्धन की जांच रिपोर्ट में तमाम गड़बड़ी साबित हुई थी।
बड़ा सवालः मरे हुए आदमी ने कैसे बेची जमीन?
डीएम रविनाथ रमन ने एडीएम से जांच कराई और रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेजी। रिपोर्ट में यही कहा कि इस पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाना उचित रहेगा। जो नत्थूलाल 1983 में मर चुका है, उसने जमीन कैसे बेच दी, यही बुनियादी अपराध है। जिसने रजिस्ट्री की है वही फर्जी था, इसलिए उसकी खोज होनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि एसडीएम द्वारा जमीन का डिमार्केशन करने से मना कर दिए जाने के बाद जमीन की रजिस्ट्री की गई।
जांच के बाद शासन को भेजी सिफारिश
: डीएसपी स्वतंत्र कुमार की रिपोर्ट के अनुसार भुगतान संयुक्त खाते में किया गया। नत्थूलाल को केवल एक लाख रुपया मिला और बाकी दूसरे खातेदार को मिला। दूसरे खातेदार की भूमिका क्या थी, यह जांच का विषय है।
: साबित होने के बावजूद फर्जी नत्थूलाल पर कोई कार्रवाई नहीं किया जाना सवाल खड़े करता है।
: जमीन के म्यूटेशन से पहले कई लोगों की आपत्ति को राजस्व अधिकारी ने अनदेखा क्यों किया ?
: पूरे प्रकरण की जांच पुलिस के अलावा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।