बस हादसे से खुली सिस्टम की पोल, घंटों तड़पते रहे घायल
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देहरादून के त्यूनी में बस दुर्घटना के बाद सिस्टम की सुस्ती ने घायलों का दर्द बढ़ा दिया। सिस्टम की घोर लापरवाही के चलते मरीजों को करीब चार घंटे तक उपचार नहीं मिल सका। करीब दो घंटे तक प्रभारी सीएमओ डॉ. वाईएस थपलियाल डॉक्टरों की मान मनौव्वल करते रहे। लेकिन, पहाड़ ना चढ़ने के आदी डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। किसी तरह चिकित्सक जाने को तैयार हुए तो करीब एक घंटे तक हेलीकॉप्टर ही नहीं मिला।
आपदाओं से निपटने में सरकारी तंत्र की विफलता का एक और नमूना त्यूनी में हुई बस दुर्घटना के बाद देखने को मिला। बस दुर्घटना में कई लोग मारे गए और कई घायल हुए। घायलों के लिए एक-एक मिनट का समय बेहद महत्वपूर्ण था। उन्हें तुरंत उपचार की जरूरत थी। लेकिन पहले डॉक्टरों और बाद में हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था ना हो पाने के कारण उनकी परेशानी बढ़ गई।
मंगलवार सुबह त्यूनी में बस दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद जिलाधिकारी रविनाथ रमन ने प्रभारी सीएमओ डॉ. वाईएस थपलियाल को तत्काल डॉक्टरों की टीम तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को हेलीकॉप्टर के जरिये त्यूणी भेजा जाएगा, ताकि घायलों को मौके पर ही उपचार उपलब्ध हो सके।
डॉक्टर मिले तो हेलीपैड पर घंटे भर तक इंतजार
सीएमओ ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा को तीन चिकित्सकों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। डॉ. टम्टा ने ऑर्थोपेडिक विभाग के एचओडी डॉ. अनिल जोशी, डॉ. केएस सोन और डॉ. आरसी रावत को मौके पर जाने के निर्देश दिए। इसी बीच सीएमओ खुद भी अस्पताल पहुंच गए।
कुछ देर बाद डॉ. अनिल जोशी ने खुद जाने से इंकार कर दिया और एसआर डॉ. अभिषेक को हैलीपेड पहुंचने के निर्देश दिए। डॉ. अभिषेक के पहुंचने के बाद तीनों चिकित्सक एंबुलेंस के जरिये हेलीपैड के लिए रवाना हुए। हेलीपैड पहुंचने पर चिकित्सकों को तत्काल हेलीकॉप्टर नहीं मिल पाया। उन्होंने एमएस और सीएमओ को इसकी जानकारी दी। करीब एक घंटे इंतजार के बाद उन्हें हेलीकॉप्टर मुहैया कराया जा सका।
चिकित्सकों की व्यवस्था करने में मुझे करीब दो घंटे का समय लग गया। मैं और एमएस खुद डॉक्टरों को कहते रहे लेकिन वह जल्दी तैयार नहीं हुए।
-डॉ. वाईएस थपलियाल, प्रभारी सीएमओ
हैलीपेड पर पायलट ना होने के चलते ज्यादा समय लग गया। गुप्तकाशी से हेलीकॉप्टर के जरिये पायलट दून तक पहुंचा, इसके चलते करीब एक घंटे का समय लगा।
-रविनाथ रमन, जिलाधिकारी