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...ऐसे तो लग गए उद्योग, हो गया भला
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 10 Sep 2013 05:46 PM IST
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सरकार के बुलावे पर उत्तराखंड में करीब 45 करोड़ रुपये पूंजी निवेश की मंशा जाहिर कर रहे प्रवासी उद्यमी दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं।
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हाल यह है कि इन 183 उद्यमियों को प्रदेश में कुल 20 एकड़ जमीन ही नहीं मिल पा रही है। सिडकल हाथ खड़े कर चुका है और जिला उद्योग केंद्रों को अधिकार नही है कि उद्यमियों को जमीन उपलब्ध कराए।
2010 में विशेष केंद्रीय पैकेज समाप्त
ऐसे में उद्योगों के सहारे प्रदेश की विकास दर को बनाए रखने केसरकारी दावा भी खोखला साबित हो रहा है। 2010 में विशेष केंद्रीय पैकेज समाप्त होने के बाद तत्कालीन प्रदेश सरकार ने दिल्ली, मुंबई और अन्य स्थानों पर बसे उत्तराखंडी प्रवासियों से प्रदेश में निवेश करने का आग्रह किया था।
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यह क्रम तब से लगातार जारी है और प्रदेश सरकार दिल्ली और मुंबई में हर साल प्रवासी सम्मेलन का आयोजन करती आ रही है। इन सम्मेलनों में भी उत्तराखंड में निवेश का आग्रह उद्यमियों से किया जाता रहा है।
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उद्योग कल्याण समिति बनाई
सरकार की बातों पर यकीन कर उत्तराखंड पहुंचे ये उद्यमी अब खुद का ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इन्होंने बकायदा पर्वतीय उद्योग कल्याण समिति बनाई हुई है और इस मंच के जरिए ये अपनी बात को आगे रखने की कोशिश भी कर रहे हैं।
मुसीबत यह है कि इस समिति के 183 सदस्य उद्यमियों को प्रदेश में सरकार से 20 एकड़ जमीन ही नहीं मिल पा रही है। ये उद्यमी करीब 45 करोड़ रुपये निवेश करने को तैयार हैं।
2000 एकड़ औद्योगिक भूमि मिली
इनका कहना है कि इससे सरकार को हर साल 25 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। प्रदेश में करीब 2000 लोगों का रोजगार मिलेगा।
पर हकीकत यह है कि समिति ने जमीन की समस्या को देखते हुए नए सदस्य बनाना बंद कर दिया है। ईएमआई पार्ट वन फाइल किए हुए इन्हें एक साल से अधिक का समय हो चुका है।
प्रदेश सरकार को दो साल पहले उत्तर प्रदेश से 2000 एकड़ औद्योगिक भूमि मिली थी। अभी तक ये औद्योगिक क्षेत्र विकसित ही नहीं किए जा सके। सिडकुल को कहा गया था कि छोटे उद्योगों को जमीन दी जाए पर सिडकुल ने भी हाथ खड़े कर दिए।
इनकी भी सुनिए
एक साल हो गया कहते-कहते। अभी तक जमीन नहीं मिली। सिडकुल के लिए कहा गया था कि 25 प्रतिशत जमीन छोटे उद्योगों को दी जाएगी। पर सिडकुल अब मना कर रहा है। उद्योग निदेशालय और एमएसएमई विभाग को जमीन देने का अधिकार ही नहीं। ऐसे में उद्यमी करेंगे क्या।
- दीपक ढौंडियाल, अध्यक्ष पर्वतीय उद्योग कल्याण समिति
सिडकुल बड़े उद्योगों के लिए अलग और छोटे उद्योगों के लिए अलग दरेनिर्धारित नहीं कर सकता। यूपी से मिले 18 औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा। छौटे उद्योगों के लिए अलग से जमीन की व्यवस्था की जा रही है।
- शैलेश बगोली, एमडी सिडकुल