मलयेशिया में फंसे 11 भारतीय जल्द लौटेंगे अपने घर
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मलयेशिया में फंसे 11 भारतीय युवकों के घर लौटने का रास्ता साफ हो गया है। इनमें 9 युवक उत्तराखंड के हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस संबंध में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को कई पत्र भेजे थे, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने मलयेशिया सरकार से बात की थी। सभी युवकों के पासपोर्ट होटल प्रबंधन ने उन्हें दे दिए हैं।
दरअसल, मलयेशिया के कानून के अनुसार वहां नौकरी के लिए जाने वाले विदेशियों के पासपोर्ट नियोक्ता के पास जमा हो जाते हैं। जब तक नियोक्ता एनओसी के साथ पासपोर्ट ना दे तब तक कोई वापस नहीं लौट सकता।
यदि कोई बगैर एनओसी वापस आने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। पिछले साल मलयेशिया के एक होटल में नौकरी करने गए 11 भारतीय युवक वहां फंस गए थे।
होटल मालिक ने पासपोर्ट कर लिया था जब्त
यह युवक वापस आने चाहते थे, लेकिन होटल मालिक ने पासपोर्ट और एनओसी देने से इनकार कर दिया था। साथ ही पिछले दो माह का वेतन भी नहीं दिया। उन्होंने किसी प्रकार भारतीय दूतावास को संदेश भिजवाया।
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट और प्रदेश सचिव मूर्ति सिंह नेगी ने बताया कि सीएम ने मामले में तत्परता दिखाते हुए विदेश मंत्रालय से बात कर समस्या का समाधान कराया है। विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इन युवाओं को नियोक्ता ने एनओसी व पासपोर्ट दे दिए हैं।
खाली हाथ लौट रहे इन युवकों के हवाई टिकट की व्यवस्था भी कराई जा रही है। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित उत्तराखंड के प्रमुख स्थानिक आयुक्त कार्यालय को भी भेज दी है।