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कारगिल युद्घ में इसलिए भारतीय सेना की कायल हुई थी दुनिया

Sun, 26 Jul 2015 02:55 PM IST
नवीन भट्ट/ अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)
नवीन भट्ट/ अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा) Updated Sun, 26 Jul 2015 02:55 PM IST
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indian army sat example in kargil war.

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना की मानवता का पूरा विश्व कायल हो गया। दरअसल, हार देखकर पाकिस्तानी सेना अपने घायल सिपाहियों को जंगे मैदान में छोड़कर भाग निकली थी, जबकि सैकड़ों सैनिकों के पार्थिव शरीर भी वहीं पड़े थे।

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लेकिन भारतीय सेना ने न केवल घायलों का उपचार कराकर उन्हें पाकिस्तान वापस भेजा, बल्कि युद्ध में मारे गए पाक सैनिकों का उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार भी कराया। अमर उजाला से विशेष बातचीत में रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ले. जनरल (अप्रा.) मोहन चंद्र भंडारी ने यह जानकारी दी।
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कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के अगुवा रहे श्री मोहन चंद्र भंडारी ने बताया कि कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना अपने घायल और मारे गए सैनिकों को भी छोड़कर भाग निकली थी।
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युद्ध में घायल पाकिस्तान की पांचवीं बटालियन नार्दर्न लाइट इंफैंट्री के नायक इनायत अली और सिपाही हूमर शाह का भारतीय सेना ने उपचार कराया, जब दोनों को स्वदेश रवाना किया जा रहा था तो दोनों अपने देश की सेना को कोसते नजर आए और उन्होंने भारतीय सेना के जज्बे को सलाम किया।

कुमाऊं रेजीमेंट ने सल्तोरिन रेंज पर जमाया कब्जा

indian army sat example in kargil war.

यही नहीं, भारतीय सेना ने युद्ध में मारे गए 179 पाक सैनिकों का मुस्लिम धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार किया। इससे भारत की मानवता पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो गई थी।

दरअसल, पाकिस्तानी सेना ने कारगिल युद्ध का तानाबाना प्रतिशोध के लिए बुना था। 13 अप्रैल 1984 को भारतीय सेना की चार कुमाऊं रेजीमेंट ने सियाचिन के सल्तोरिन रेंज पर कब्जा जमाया था, इसीलिए पाकिस्तान प्रतिशोध की आग में जल रहा था।

चार जून 1999 को पाकिस्तानियों ने कारगिल में घुसपैठ कर दी। लगभग एक माह तक मास्को, द्रास, यालदोर, बटालिक, चोर वाटला और तुर्तो घाटी में यह युद्ध हुआ। 13 जून को भारत ने टोलोरिंग घाटी पर कब्जा जमा लिया था, यहीं से भारत की युद्ध में पकड़ बन गई थी।

25 जुलाई को भारत ने पाकिस्तानी सेना के सभी पोस्टों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इसीलिए 26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाया जाता है। बोफोर्स तोप का इस्तेमाल भी पहली बार इसी युद्ध में हुआ था और यह तोप काफी कारगर साबित हुई थी। उन्होंने बताया कि भारत अब दूसरा कारगिल नहीं चाहता है। इसीलिए उस क्षेत्र में दो डिवीजन सेना तैनात है। वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

सामरिक नीति नहीं होना चिंताजनक
ले. जनरल (अप्रा) भंडारी का कहना है कि विश्व का सातवां बड़ा राष्ट्र होने के बावजूद भारत ने आज तक लिखित सामरिक नीति नहीं बनाई, जबकि सभी राष्ट्रों के पास लिखित सामरिक नीतियां हैं। इसीलिए सबसे बड़ी सशस्त्र सेनाएं होने के बाद भी भारत कई क्षेत्रों में पिछड़ जाता है। राजनेताओं को भी भारतीय सेना को स्वतंत्र अधिकार देना चाहिए।

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