वायुसेना दिवस: ग्रुप कैप्टन यशपाल ने बढ़ाया उत्तराखंड का गौरव, बालाकोट स्ट्राइक की योजना में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
- बालाकोट स्ट्राइक और वायुसेना में उल्लेखनीय कार्य के लिए मिला वाईएसएम व वीएसएम
- यशपाल ने बालाकोट स्ट्राइक में बम गिराने की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
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पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी लॉन्चपैड पर बम गिराने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने वाले उत्तराखंड के लाल को वायु सेना दिवस पर दो पदकों से सम्मानित किया गया है।
बालाकोट के लिए उन्हें युद्ध सेवा मेडल जबकि वायु सेना में उल्लेखनीय सेवा के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया। वायु सेना के 88वें स्थापना दिवस पर बृहस्पतिवार को गाजियाबाद स्थित हिंडन वायु सेना स्टेशन में आयोजित कार्यक्रम में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार भदौरिया ने उन्हें यह पदक प्रदान किए। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी उन्हें वायु सेना मेडल के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
ग्रुप कैप्टन यशपाल सिंह नेगी मूलरूप से टिहरी गढ़वाल के निवासी हैं। वर्तमान में उनका परिवार देहरादून में रहता है। वह 1990 में एनडीए में चयनित हुए। उस समय उनकी ऑल इंडिया में पांचवीं रैंक आई थी।
25 सालों से वायु एरिया की हिफाजत में लगे हुए
तीन साल एनडीए में ग्रेजुएशन करने के बाद वह छह माह इलाहाबाद, छह माह हैदराबाद ट्रेनिंग में चले गए। 16 दिसंबर 1995 में वह एयर फोर्स के फ्लाइंग ब्रांच में पायलेट के तौर पर कमीशंड हुए थे।
वर्तमान में वह एयर फोर्स स्टेशन श्रीनगर में तैनात हैं। वह पिछले 25 सालों से वायु एरिया की हिफाजत में लगे हुए हैं। यशपाल उन चुनिंदा अफसरों में शामिल हैं, जिन्होंने बालाकोट में हुए सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी प्लानिंग की थी।
वह एक कॉम्बेट पायलेट हैं जो वायु सेना में फाइटिंग भी करते हैं, मिसाइल भी छोड़ते हैं और पूरी रणनीति भी तैयार करते हैं। वायु सेना दिवस पर दो-दो मेडल लेकर न केवल उन्होंने अपने माता-पिता का नाम बल्कि उत्तराखंड का नाम भी ऊंचा किया है।