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India Open 2022: लक्ष्य सेन को विरासत में मिला बैडमिंटन, बेटे को मंजिल तक पहुंचाने के लिए पिता ने छोड़ा शहर

Mon, 17 Jan 2022 03:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अभिषेक सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी
अभिषेक सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 17 Jan 2022 03:25 PM IST
सार

लक्ष्य सेन ने रविवार को अपना पहला वर्ल्ड टाइटल जीतकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। लक्ष्य सेन को उसकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उनके पिता डीके सेन ने दिन रात एक कर दिया।

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India Open 2022: Lakshya Sen get badminton in Heritage
लक्ष्य सेन - फोटो : twitter@BAI_media

विस्तार

लक्ष्य सेन के दादा सीएल सेन को अल्मोड़ा में बैडमिंटन का भीष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने कुछ दशक पहले अल्मोड़ा में बैडमिंटन की शुरुआत की और आज एक से बढ़कर एक खिलाड़ी अल्मोड़ा से निकलकर देश और दुनिया के पटल पर छा रहे हैं। लक्ष्य का अगला लक्ष्य ऑल इंग्लैंड टूर्नामेंट है जो मार्च में होना है।

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डीके सेन के बेटे लक्ष्य सेन ने रविवार को अपना पहला वर्ल्ड टाइटल जीतकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। यूनेक्स सनराइज इंडिया ओपन-2022 के फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन ने सिंगापुर के खिलाड़ी लोह केन यू को 24-22 और 21-17 के अंतर से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया। लक्ष्य सेन को उसकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उनके पिता डीके सेन ने दिन रात एक कर दिया।
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डीके सेन ने अपने दोनों बेटों को बेहतर बैडमिंटन खिलाड़ी बनाने के लिए अल्मोड़ा तक छोड़ दिया और बेंगलुरु चले गए। हालांकि अल्मोड़ा से उनका रिश्ता अब भी है और हाल ही में लक्ष्य ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जब कांस्य पदक जीता तो पूरा परिवार यहां आया और शहरवासियों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। 
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जाने-माने कोच हैं डीके सेन 
लक्ष्य के पिता डीके सेन बैडमिंटन के जाने-माने कोच हैं और वर्तमान में प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। पिता की देखरेख में लक्ष्य ने होश संभालते ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया और वह चार साल की उम्र से स्टेडियम जाने लगे। छह-सात साल की उम्र में ही लक्ष्य का खेल और उसकी प्रतिभा हर किसी को हैरान करती थी। 2018 में लक्ष्य ने जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप अपने नाम की थी। अब उन्होंने अपना पहला वर्ल्ड टाइटल जीता है। इससे पहले उनकी अगुवाई में पिछले महीने स्पेन में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता था। लक्ष्य ने पिता और कोच डीके सेन की अगुआई में लगातार दूसरा पदक जीता है।

लक्ष्य पर पड़ी थी पादुकोण की नजर 

प्रोफाइल
नाम   - लक्ष्य सेन
उम्र  -  20 साल
पिता का नाम  -  डीके सेन 
माता का नाम  -  निर्मला सेन
विजन   - जोश और जज्बे के साथ खेलना

सभी लोगों का आभार : सेन
लक्ष्य की सफलता से गदगद कोच पिता डीके सेन ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि जिन लोगों ने लक्ष्य को आगे बढ़ाने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया है वह उन सभी का आभार जताते हैं। उन्होंने खास तौर पर बैडमिंटन खिलाड़ी और कोच प्रकाश पादुकोण, विमल कुमार का आभार जताया है। लक्ष्य की मां निर्मला ने भी सभी को बधाई दी। 

डीके सेन ने बताया कि एक बार इसे प्रकाश पादुकोण की अकादमी ले गया तो वहां पर यह कहने लगा कि मैं भी खेलूंगा। तब प्रकाश पादुकोण ने पूछा ‘ये छोटू क्या पूछ रहा है’ तो मैंने कहा खेलने के लिए कह रहा है। इसके बाद उन्होंने लक्ष्य को कोर्ट पर जाने के लिए कहा। बकौल डीके सेन उसका खेल देखकर उस समय पादुकोण ने कहा था कि इस पर मेहनत करो और आज नतीजा सामने है।  

नहीं मिला शैतानी के लिए वक्त 
लक्ष्य की मां निर्मला सेन भी बेटे की कामयाबी से काफी खुश नजर आईं। उनसे जब लक्ष्य के बचपन और उसकी शैतानियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दोनों भाई लक्ष्य और चिराग काफी सीधे थे, कभी परेशान नहीं किया। हालांकि उन्होंने कहा कि पढ़ाई और प्रैक्टिस के बीच शैतानी के लिए दोनों को ही वक्त नहीं मिला।

अभी तो शुरुआत है 
डीके सेन ने कहा कि बेटे की सफलता से उत्साहित हूं लेकिन अभी उसे बहुत लंबा सफर तय करना है। उसके लिए यह शुरुआत है और अच्छी बात यह है कि लक्ष्य इस बात को बेहतर समझता है। फिलहाल उसका फोकस अपनी रैंकिंग को और बेहतर करने पर है। वर्तमान में 61747 प्वाइंट के साथ उसकी विश्व बैडमिंटन रैंक 17 है। 
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