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भारत-नेपाल मैत्री के 70 साल: खुली सीमा के बीच बढ़ा रिश्तों के खटास का खतरा
Sat, 01 Aug 2020 02:09 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
चंद्रशेखर जोशी, अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी, अमर उजाला, चंपावत
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 01 Aug 2020 02:09 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला (File Photo)
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दो देश होते हुए भी कभी ऐसा नहीं लगा कि हम अलग-अलग हैं। दोस्ती ऐसी कि नेपाल के नागरिक भारत की सीमा की हिफाजत के लिए सेना में भर्ती होते हैं और सांस्कृतिक, धार्मिक संबंध ऐसे कि सीमा बेमानी लगती है। आवाजाही इस कदर आसान कि न कोई पासपोर्ट न कोई वीजा।
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भारत-नेपाल के बीच के अपनापन लिए रिश्तों की ये गौरवपूर्ण गाथा रही है। पर बीते कुछ वक्त से इन रिश्तों में बर्फ जमी है। छोटे भाई का दर्जा पाने वाले नेपाल की ओर से की जा रही अतिक्रमण की हरकतों ने रिश्तों पर बर्फ डालने का काम किया है। जानकार बताते हैं कि नेपाल की ये कारिस्तानी चीन के उकसावे में कर रहा है। उसके इस कदम, इस नजरिए को नेपाल की जनता का समर्थन नहीं है।
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नेपाल से लगी भारत की 1751 किलोमीटर लंबी सीमा चार राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल) से लगी है। इसमें 90 किमी की सीमा चंपावत जिले से लगी है। बीते दो सप्ताह से टनकपुर से लगी ब्रहमदेव (नेपाल) से लगी नो मेंसलैंड में नेपाल की ओर से पौधरोपण के बहाने अतिक्रमण कर अविश्वास के बीज बोए जा रहे हैं। चंपावत जिला प्रशासन की ओर से संवाद के जरिए मामले को निपटाने के प्रयास भी किए गए।
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डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय और एसपी लोकेश्वर सिंह अतिक्रमण विवाद के बाद से नियमित रूप से कंचनपुर के सीडीओ व एसपी से फोन पर संपर्क करते रहे। मगर नेपाल के अधिकारियों की ओर से मीटिंग की तिथि तक नहीं बताई गई। इधर भारत के कई पूर्व सैन्य अधिकारी मानते हैं कि नेपाल का रवैया दोस्ती के रिश्तों पर दरार डालने वाला है। मगर नेपाल ये हरकत चीन के उकसावे में कर रहा है।
चीन साजिश के तहत नेपाल को मोहरा बना इस करतूत को अंजाम दे रहा है। ऐसा कर वह नेपाल के साथ भारत की दरार को चौड़ा करने की मंशा को पूरा करना चाहता है। नेपाल के आम लोग अपनी सरकार के भारत विरोधी नजरिए का समर्थन नहीं करते हैं। ऐसे में भारत को वेट एंड वॉच की नीति का पालन करना चाहिए।
- रिटायर्ड कर्नल सुरेश सिंह अधिकारी, चंपावत
नेपाल से भारत के ताल्लुकात आज के नहीं, पुरखों के जमाने के हैं। नेपाल की ओर से किया जा रहा सीमा विवाद चीन के उकसावे के साथ नेपाल के आंतरिक हालात से ध्यान बंटाने का हथकंडा है। ये ठीक है कि नेपाल से भारत के रोटी-बेटी के रिश्तों के संबंध हैं, लेकिन नेपाल को कड़ा संदेश देने के लिए जरूरी कदम उठाना चाहिए।
- रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर मोहन चंद्र शर्मा, चंपावत
कमजोर नहीं होने देंगे रोटी-बेटी के रिश्ते :सांसद
भारत-नेपाल सीमा में टनकपुर से लगे नो मैंसलैंड क्षेत्र में नेपाल की ओर से किए जा रहे अतिक्रमण विवाद को शांति और सौहार्द के साथ निपटाने की भारत ने उम्मीद जताई है। अमर उजाला से फोन पर बात करते हुए अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा ने कहा कि भारतीय एजेंसियां और प्रदेश सरकार पूरे मामले में नजर बनाए हुए हैं। देश हित में जो भी उचित निर्णय होगा, लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी तौर पर उनके (सांसद) पास सीमा विवाद से संबंधित कोई सूचना नहीं है।
तय नहीं हो सकी बैठक की तिथि
चंपावत। नो मैंसलैंड विवाद को निपटाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय और एसपी लोकेश्वर सिंह नियमित रूप से नेपाल के कंचनपुर के सीडीओ व एसपी से फोन पर बात कर रहे हैं। मगर दोनों देशों के सीमांत जिले के अफसरों के बीच बैठक की तिथि अभी तय नहीं हो सकी है।