भारत-नेपाल विवाद: नेपाल सरकार ने नया नक्शा संसद के पटल पर रखा, छपाई भी हुई शुरू
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नेपाल सरकार ने देश के नए मानचित्र को संसद के पटल पर रखा है। यह प्रस्ताव नेपाली संसद के दोनों सदनों में पास होने और राष्ट्रपति से अनुमोदित होने के बाद पुराने मानचित्र की जगह नए मानचित्र को मान्यता दे दी जाएगी। हालांकि इसे महज औपचारिकता ही माना जा रहा है, क्योंकि नेपाल सरकार के भूमि प्रबंधन विभाग ने नए नक्शे की छपाई शुरू कर दी है।
बता दें कि नेपाल सरकार ने भारत के लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र को अपने नए नक्शे में दर्शाया था। जिस पर भारत सरकार ने भी आपत्ति जताई थी। सूत्रों के मुताबिक ओली सरकार संविधान में संशोधन होते ही नए नक्शे के उपयोग को लेकर सभी मंत्रालयों को एक परिपत्र जारी करेगी। विदेश मंत्रालय के माध्यम से नेपाल के नए नक्शे और नए निशान का उपयोग विभिन्न राज्यों के दूतावासों के अलावा संयुक्त राष्ट्र में भी किया जाएगा।
सड़क निर्माण से पहले पैदल रास्ते को दुरुस्त करेगी नेपाल सेना
तवाघाट- लिपुलेख सड़क के लिंक होने के बाद से नेपाल ने दार्चुला जिले के सीमावर्ती इलाकों में अपनी गतिविधि बढ़ा दी है। छांगरू में बीओपी स्थापित कर सशस्त्र प्रहरी बल के जवानों को तैनात करने के बाद सड़क का निर्माण करने की कवायद भी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार नेपाल सड़क निर्माण से पहले पैदल रास्ते को दुरुस्त करेगा।
चीन सीमा के छांगरु गांव के गागा में अपनी बीओपी खोल दी और पिछले दो दिनों से नेपाल सेना के हेलीकॉप्टर सीमावर्ती इलाकों में पैदल मार्ग को ठीक करने के लिए सामान पहुंचा रहे हैं। नेपाल सरकार दार्चुला से चीन सीमा के छांगरु और तिंकर गांव तक लगभग 115 किलोमीटर सड़क निर्माण का कार्य पिछले 10 सालों से कर रही है। पिछले कुछ सालों से सड़क का काम धीमी गति से हो रहा था। भारत की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग को लिपुलेख तक लिंक करने के बाद नेपाल सरकार ने भी सड़क निर्माण में तेजी लानी शुरू कर दी है। नेपाल के सूत्रों से पता चला है कि नेपाल ने अब तक दार्चुला से सुनसेरा गांव से कुछ दूर तक लगभग 40 किलोमीटर लंबी सड़क की कटिंग कर दी है।
पिछले दो दिनों से नेपाल के सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा सड़क निर्माण के सामान को घाटीबगड़ नामक जगह पर पहुंचाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस सड़क का निर्माण सेना की देखरेख में होगा। सेना पहले पैदल मार्ग को ठीक करेगी उसके लगभग तीन से पांच माह बाद सड़क निर्माण का कार्य सेना और गांव पालिका मिलकर करेंगे। नेपाल की अपनी सड़क और पैदल रास्ता बनने से माइग्रेशन पर जाने वाले नेपाल के लोगों को भारतीय मार्ग से आवागमन नहीं करना पड़ेगा। दार्चुला से छांगरू तक रास्ता नहीं होने से नेपाल के छांगरू और तिंकर गांवों के लोग अपने पशुओं के साथ भारतीय मार्ग से माइग्रेशन पर जाते हैं।
स्थानीय लोग चाहते हैं जल्दी हो बातचीत
भारत और नेपाल के बीच चल रही तल्खी से सीमांत में रहने वाले दोनों देशों के लोग चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके आपस में रोटी-बेटी के रिश्ते हैं। वैवाहिक के साथ-साथ व्यापारिक संबंध भी हैं। दैनिक जरूरतों के लिए भी नेपाल के लोगों को भारतीय बाजार में आना पड़ता है। नेपाल के लोगों का कहना है कि दोनों देशों को इस मुद्दे पर शीघ्र बातचीत कर हल निकालना चाहिए। ताकि रोटी-बेटी के रिश्ते प्रभावित न हों।
नेपाल के जूलाघाट में एपीएफ की बीओपी खुली
नेपाल के जूलाघाट में सशस्त्र प्रहरी फोर्स के बॉर्डर एरिया चेकपोस्ट को विधिवत खोल दिया गया है। बीओपी खुलने से सीमा की सुरक्षा, राजस्व एकत्र करने के साथ ही भारतीय सुरक्षा कर्मियों के साथ तालमेल बनाने में आसानी होगी।
शनिवार को सूदूरपश्चिम सशस्त्र प्रहरी फोर्स के उपमहानिरीक्षक हरिशंकर बुढाथा ने नेपाल के जूलाघाट कस्बे में बल के बीओपी की विधिवत शुरआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा इससे सीमा क्षेत्र की निगरानी, राजस्व बढाने के साथ ही अपराध नियंत्रण में आसानी होगी। फिलहाल किराए के मकान में बीओपी को स्थापित किया गया है।
बल का अपना भवन बनने के बाद ज्यादा संख्या में जवानों की तैनाती की जाएगी। इस अवसर पर 51 गुल्म (बल) के डीएसपी अमित सिंह ने बताया बैतड़ी के पंचेश्वर रोलघाट में भी बीओपी बना दी गई है। जिले के पांच स्थानों में अभी और बीओपी खोली जाएंगी। उन्होने बताया सभी चैकपोस्ट खुलने के बाद भारत के साथ लगने वाले 61 किमी क्षेत्र की सुरक्षा में आसानी होगी।