फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   India Nepal Dispute: Dharchula Public angry on nepal for told Kalapani and Lipulekh as its territory

उत्तराखंड: कालापानी और लिपुलेख को नेपाल का हिस्सा बताने पर सीमांत के लोगों ने जताई नाराजगी, कही ये बात

Tue, 19 May 2020 08:22 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धारचूला(पिथौरागढ़)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धारचूला(पिथौरागढ़) Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 19 May 2020 08:22 PM IST
सार

  • माउंट अपि से लेकर शिकामल तक की जमीन भारतीय गर्ब्यालों की
  • सीमांकन के बाद गर्ब्यालों ने छोड़ दी थी नेपाल की जमीन
  • कालापानी और नाभीढांग का पूरा इलाका भारत का है और गर्ब्यालों की नाप भूमि,नेपाल का कोई अधिकार नहीं

विज्ञापन
India Nepal Dispute: Dharchula Public angry on nepal for told Kalapani and Lipulekh as its territory
indo nepal border

विस्तार

भारत के हिस्से को नेपाल के नक्शे में दर्शाने से सीमांत के लोगों में नाराजगी है। सीमांत के लोगों ने इसे नेपाल की शरारत बताते हुए यहां तक कह दिया कि नेपाल के माउंट अपि से लेकर शिमाकल तक की भूमि भारत के गर्ब्यालों की नाप भूमि है।

विज्ञापन


लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद से मित्र राष्ट्र नेपाल के सुर बदले नजर आ रहे हैं। कालापानी और लिपुलेख को अपनी भूमि बताने वाले नेपाल ने दो दिन पूर्व नया नक्शा भी जारी किया है, जिसमें अतीत से भारत का हिस्सा रहे कालापानी और लिपुलेख को नेपाल में दर्शाया गया है।
विज्ञापन



यह भी पढ़ें: नेपाल ने जारी किया नया नक्शा, भारत के कालापानी और लिपुलेख को बताया अपना क्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे सीमांत के लोगों में नाराजगी है। रं कल्याण संस्था के अध्यक्ष एवं गर्ब्यांग गांव निवासी कृष्णा गर्ब्याल का कहना है कि नेपाल स्थित माउंट अपि, तिपिल छ्यक्त, छिरे, शिमाकल आदि स्थल भी गर्ब्यालों की नाप भूमि है। सीमा के बंटवारे के बाद काली नदी पार की भूमि गर्ब्यालों ने छोड़ दी थी।

कालापानी और नाभीढांग का पूरा इलाका भारत का हिस्सा

उन्होंने कहा कि कालापानी में सरहद का स्थलीय सीमांकन मंदिर परिषद के 50 मीटर दूर नाले में है। इसके बाद कौवा क्षेत्र की ओर नेपाल का इलाका पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कालापानी और नाभीढांग का पूरा इलाका भारत का है और गर्ब्यालों की नाप भूमि है। जिसमें नेपाल का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि दो लिपुलेख है एक भारत में जबकि दूसरा नेपाल में है। नेपाल का लिपुलेख नेपाल के तिंकर गांव से 25 किमी आगे है जो अलग लिपुलेख नाम से है। नेपाल सरकार लिपुलेख नाम का फायदा उठाकर गुमराह कर रही है।

कालापानी और लिपुलेख की जमीन भारत की है। यह भारत का अभिन्न हिस्सा है। स्थानीय लोगों के नाम पर यह भूमि दर्ज है। इसके साक्ष्य उपलब्ध हैं।
-अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम धारचूला।

दोनों मित्र राष्ट्र बातचीत करेंगे और मामले का हल निकालेंगे- सांसद अजय टम्टा

लिपुलेख और कालापानी को लेकर सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा का कहना है कि कालापानी और लिपुलेख भारत का हिस्सा है। दोनों देशों के रोटी-बेटी के रिश्ते हैं। इस मामले पर दोनों देश बैठकर बातचीत से मसले का हल निकालेंगे।

सांसद अजय टम्टा ने कहा कि भारत-नेपाल मित्र राष्ट्र हैं। सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से दोनों एक हैं। दोनों राष्ट्रों के नागरिक देवी-देवताओं और ईस्ट देवता की पूजा के लिए एक दूसरे के देश में जाते हैं। कैलाश मानसरोवर की यात्रा सुगम हो इसलिए भारत ने अपनी भूमि में लिपुलेख तक सड़क का निर्माण किया है। सीमा पर विवाद या शंका जैसी कोई स्थिति नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा है तो दोनों मित्र राष्ट्र बातचीत करेंगे और मामले का समाधान किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed