भारत-नेपाल सीमा: नो मैंस लैंड की विवादित भूमि से नेपाल ने हटाया पीसीआर टिनशेड
- पुलिया निर्माण के लिए खोदा गया गड्ढा नहीं भरा गया
- भारतीय प्रशासन की आपत्ति पर चेता नेपाल प्रशासन
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भारतीय प्रशासन की आपत्ति जताने के 21 दिन बाद नेपाल ने टनकपुर सीमा से लगे ब्रह्मदेव के विवादित नो मैंस लैंड से शांति पुनर्स्थापना गृह (पीसीआर) टिनशेड हटा लिया है। हालांकि, पुलिया निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे को अभी तक नहीं भरा गया है।
भारत-नेपाल की सीमा स्पष्ट नहीं होने से आए दिन सीमा पर अतिक्रमण का विवाद नेपाल की ओर से पैदा किया जाता है। नेपाल की ओर से गत 12 मार्च को भी विवादित नो मैंस लैंड पर पुलिया निर्माण के लिए खोदाई और शांति पुनर्स्थापना गृह (पीसीआर) का टिनशेड रखे जाने पर विवाद खड़ा हो गया था।
भारतीय प्रशासन की आपत्ति के बाद नेपाल ने पुलिया का निर्माण रोक दिया था और टिनशेड को हटाने का भरोसा दिया था पर 21 दिन बाद भी अतिक्रमण की यथास्थिति बनी रही। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर नेपाल ने पीसीआर टिनशेड को विवादित भूमि से हटाकर नेपाल की ओर शिफ्ट कर लिया है। भारतीय सीमा पर तैनात एसएसबी के अधिकारियों ने भी टिनशेड हटाने की पुष्टि की है।
भारत और नेपाल के बीच हो रेल लाइन का विस्तार
किसी समय ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की वकालत करने वाले कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भारत और नेपाल के बीच रेल लाइन के विस्तार का मुद्दा उठाया है। उन्हाेंने नेपाल के राजदूत एचई नीलांबर आचार्य से मुलाकात कर रेल लाइन, पंचेश्वर बांध और पर्यटन समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने दिल्ली में नेपाल दूतावास में राजदूत एचई नीलांबर आचार्य और मंत्री डीसीएम रामप्रसाद सुबेदी दूतावास से भेंट की। उन्होंने नेपाल के लुंबिनी से गोरखपुर और जनकपुर से अयोध्या के बीच रेल लाइन का विस्तार करने का मुद्दा उठाया। महाराज ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में भारत नेपाल की खुली सीमा दोनों देशों के संबंधों की विशेषता है। जिससे दोनों देशों के लोगों को आवागमन में सुगमता रहती है। दोनों देशों के नागरिकों के बीच आजीविका के साथ विवाह और पारिवारिक संबंधों की मजबूत नींव है। इस नींव को ही रोटी-बेटी का रिश्ता नाम दिया गया है।
नेपाल के राजदूत से बातचीत में महाराज ने कहा कि नेपाल भारत का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है और सदियों से चले आ रहे भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंधों के कारण हम एक दूसरे के लिए विशेष महत्व रखते हैं। बुद्ध का जन्म वर्तमान नेपाल में स्थित लुंबिनी में हुआ था। बाद में बुद्ध ज्ञान की खोज में वर्तमान भारतीय क्षेत्र बोधगया आए, जहां उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ। साथ ही रामायण सर्किट की योजना दोनों देशों के मजबूत सांस्कृतिक व धार्मिक संबंधों का प्रतीक है। इसलिए जरूरी है कि दोनों देशों के बीच रेलवे लाइन का विस्तार होना चाहिए। महाराज ने कहा कि पंचेश्वर बांध समेत विभिन्न विकास योजनाओं में नेपाल सहयोगी है। इसलिए आवश्यक है कि आपसी मैत्री व सहयोग से विभिन्न विकास योजनाओं को लेकर सद्भावना के साथ आगे बढ़े।