सदियों पुरानी वस्तुओं की आदान-प्रदान व्यवस्था पर चल रहा भारत-चीन कारोबार, नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं
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संचार और विकास के दौर में भारत-चीन कारोबार अब भी सदियों पुरानी वस्तुओं के विनिमय के आधार पर चल रहा है।आजादी के 71 साल बाद भी तिब्बत सीमा पर विदेशी कारोबार के लिए सबसे जरूरी मनी एक्सचेंज बैंक, एटीएम, माल गोदाम, सड़क और ट्रांसपोर्ट तक के इंतजाम नहीं हैं।
भारत के कारोबारी घोड़े-खच्चर से माल की ढुलाई करते हैं। जबकि, चीन ने अपनी सीमा में चकाचक सड़कों का निर्माण, कारोबार सुविधा जुटाने से लेकर व्यापारियों के मनोरंजन के लिए नाइट क्लब और होटल तक तैयार कर दिए हैं।
भारत चीन के बीच वर्षों से वस्तुओं का आयात-निर्यात होता है। चीन में स्थित तकलाकोट मंडी में दोनों देशों के कारोबारी पहुंचते हैं। हर साल इसी मंडी से लाखों का कारोबार होता है। भारत से गुड़, मिश्री, कॉफी, तंबाकू, ऊनी कपड़े, एल्यूमिनियम के बर्तन, कॉस्मेटिक सामान और टॉफियां निर्यात होती हैं।
चीन से याक की पूंछ, बकरी की ऊन (गोट पसम ), रजाइयां, कपड़े, जूते और जैकेट आयात होते हैं। इधर, भारत चीन कारोबार को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कारोबारियों को बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं हैं। भारतीय कारोबारी धारचूला से 54 किमी खतरे का सफर गाड़ी से और फिर 52 किमी पैदल चलकर दुर्गम पहाड़ को पार कर तकलाकोट की मंडी पहुंचते हैं।
मनी एक्सचेंज बैंक नहीं होने से दोयम दर्जे का माल खरीदने को मजबूर
चीन की मुद्रा युआन है। गुंजी में मनी एक्सचेंज बैंक नहीं है। भारतीय कारोबारी जो माल निर्यात करते हैं, उसका चीनी मुद्रा में भुगतान होता है। मनी एक्सचेंज बैंक नहीं होने से भारतीय कारोबारी चीनी मुद्रा में भुगतान नहीं लेकर माल लेने को मजबूर हैं। चीनी कारोबारी इसका फायदा उठाकर दोयम दर्जे का भी माल भारतीयों को थमा देते हैं।
माल रखने को नहीं हैं सरकारी गोदाम
धारचूला से गुंजी तक एक भी सरकारी गोदाम नहीं है। भारतीय कारोबारी अपना माल सड़क किनारे खुले और तंबू में रखने के लिए मजबूर हैं। अति दुर्गम में होने की वजह से भारतीय कारोबारियों को किराये का भी गोदाम नहीं मिल पाता है। आपदा, बारिश में माल नष्ट हो जाता है।
जान, माल दोनों का है खतरा
गुंजी में 1998 में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा खुली थी। कारोबारियों के लिए एटीएम की सुविधा नहीं होने की वजह से भारतीय कारोबारी लाखों रुपये नगद ले जाने को मजबूर होते हैं। 52 किमी दुरूह रास्ते में जान माल दोनों का खतरा बना रहता है।
न अस्पताल न होटल, सिर्फ मुसीबत
ट्रांसपोर्ट नहीं होने से बढ़ जाती है लागत
तकलाकोट मंडी से धारचूला तक ट्रांसपोर्ट का इंतजाम नहीं होने से माल की लागत बढ़ जाती है। 70 किलो के एक बोरे पर 2800-3000 रुपये अतिरिक्त चुकाने होते हैं। इससे माल की कीमत बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं व्यापारी
सरकार अगर ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर दे तो कारोबारियों को सुविधा होगी। सड़क नहीं होने से भारतीय कारोबारी की जान माल दोनों का खतरा बना रहता है। -शर्मिला रायपा
1998 के बाद एक भी चीनी व्यापारी भारत नहीं आया, हम लोग वहां जाने को मजबूर हैं। भारत सरकार को भी चीन की तरह भारतीय कारोबारियों को बुनियादी सुविधाएं देनी चाहिए। -प्रभात सिंह