भारत-चीन सीमा: बाड़ाहोती में ड्रेगन की हरकतों के बाद लिपुलेख सीमा पर भी सुरक्षा एजेंसियां चौकस
बता दें कि पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी से लेकर धारचूला के लिपुलेख तक का क्षेत्र चीन सीमा से लगा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में चमोली जिले के बाड़ाहोती में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास ड्रेगन की गतिविधियां बढ़ने के बाद पिथौरागढ़ जिले से लगी चीन सीमा में भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने नाभीढांग से लिपुलेख में भी सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि लिपुलेख सीमा पर चीनी सेना की किसी तरह की हरकत नहीं देखी गई है। सीमा पूरी तरह से शांत है, लेकिन सीमा की कड़ी निगरानी की जा रही है।
पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी से लेकर धारचूला के लिपुलेख तक का क्षेत्र चीन सीमा से लगा है। चमोली के बाड़ाहोती में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों की गतिविधियां बढ़ने की सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पिथौरागढ़ जिले से सटी चीन सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नाभीढांग से लिपुपास के आठ से 10 किमी के दायरे में भारतीय सुरक्षा बलों की टुकड़ी दिन-रात गश्त कर रही हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के जवानों ने चौकसी के साथ ही गश्त भी बढ़ा दी है।
इस सीमा पर एक साल पूर्व चीनी सैनिकों ने अपनी सीमा से झंडे भारत की ओर दिखाने की हिमाकत की थी। चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा पर हो रहे निर्माण पर भी आपत्तिजनक रुख अपनाया था। उसके बाद से इस सीमा पर सर्दियों में माइनस 30 डिग्री तापमान में भी भारतीय सुरक्षा बलों के जवान तैनात रहे।
सरकार ने खुफिया एजेंसियों को किया चौकस
अपर मुख्य सचिव गृह आनंद बर्द्धन के मुताबिक, उन्हें भी ऐसी जानकारी मिली है। इस संबंध में खुफिया एजेंसियों को इस बारे में बता दिया गया है। उन्हें चौकस किया गया है।
लोकल इंटेलीजेंस को मजबूत करना चाहती है सेना
भारतीय सेना राज्य सरकार से यह अपेक्षा करती है कि वह सीमांत क्षेत्रों में अपनी लोकल इंटेलीजेंस को मजबूत करे। 24 जून को तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से सैन्य अधिकारी यह मसला उठा चुके हैं। सेंट्रल कमांड के जीओसी इंचार्ज ले. जनरल वाई डिमरी ने सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय खुफिया तंत्र की मजबूती पर ध्यान देने की बात कही थी। उन्होंने सीमांत क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों के चौड़ीकरण का मुद्दा भी उठाया था।